UK allows US military bases strike iran strait of hormuz after trump threats ईरान पर हमले के लिए ब्रिटेन ने अमेरिका को सौंपी सैन्य ठिकानों की चाबी! फिर भी खुश नहीं हुए ट्रंप, International Hindi News - Hindustan
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ईरान पर हमले के लिए ब्रिटेन ने अमेरिका को सौंपी सैन्य ठिकानों की चाबी! फिर भी खुश नहीं हुए ट्रंप

ब्रिटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमले के लिए अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों (डिएगो गार्सिया और RAF फेयरफोर्ड) के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। इस कदम पर ईरान ने कड़ी चेतावनी दी है।

Sat, 21 March 2026 08:16 AMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, लंदन
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ईरान पर हमले के लिए ब्रिटेन ने अमेरिका को सौंपी सैन्य ठिकानों की चाबी! फिर भी खुश नहीं हुए ट्रंप

एक बड़े नीतिगत बदलाव के तहत, ब्रिटेन ने अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाने वाले ईरानी मिसाइल ठिकानों पर हमले के लिए अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। शुक्रवार को ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस फैसले की पुष्टि की। यह कदम ब्रिटिश मंत्रियों के बीच बढ़ते युद्ध और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में से एक को बाधित करने के ईरान के प्रयासों को लेकर हुई आपातकालीन वार्ता के बाद उठाया गया है।

ब्रिटिश सरकार का तर्क: 'सामूहिक रक्षा'

वाशिंगटन की सैन्य प्रतिक्रिया का स्पष्ट समर्थन करते हुए, ब्रिटिश सरकार ने कहा कि यह कदम 'सामूहिक रक्षा' के अंतर्गत आता है। आधिकारिक बयान में कहा गया: क्षेत्र की सामूहिक आत्मरक्षा के लिए अमेरिका द्वारा ब्रिटेन के ठिकानों का इस्तेमाल करने के समझौते में अमेरिकी रक्षात्मक अभियान शामिल हैं। इसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल की जा रही मिसाइल साइटों और उनकी क्षमताओं को नष्ट करना है।

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने क्यों बदला अपना रुख?

यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब कुछ ही दिन पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ऐसे ही एक अनुरोध को यह कहते हुए टाल दिया था कि किसी भी कार्रवाई के लिए कानूनी औचित्य की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि ब्रिटेन, ईरान के साथ किसी व्यापक युद्ध में सीधे तौर पर नहीं घसीटा जाएगा। हालांकि, मध्य पूर्व में ब्रिटिश सहयोगियों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों के बाद स्टार्मर ने अपना रुख बदल लिया। अब अमेरिका ब्रिटेन के दो प्रमुख सैन्य ठिकानों का उपयोग कर सकेगा: आरएएफ फेयरफोर्ड, और हिंद महासागर में स्थित संयुक्त अमेरिका-ब्रिटेन बेस डिएगो गार्सिया।

डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया: 'बहुत देर से उठाया गया कदम'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध शुरू होने के बाद से ही स्टार्मर की आलोचना करते रहे हैं। उनका मानना था कि ब्रिटेन पर्याप्त मदद नहीं कर रहा है। इस फैसले के बाद भी ट्रंप ने अपनी आलोचना जारी रखते हुए इसे बहुत देर से दी गई प्रतिक्रिया बताया। वाइट हाउस के बाहर ट्रंप ने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो मैं ब्रिटेन से थोड़ा हैरान था- उन्हें बहुत पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए थी।

सोमवार को भी ट्रंप ने निराशा जताते हुए ब्रिटेन को कभी सहयोगियों का रोल्स-रॉयस कहा था। डिएगो गार्सिया का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रिश्ते मजबूत होने के बावजूद यह देरी असामान्य थी, और टिप्पणी की कि उन्होंने उस द्वीप का इस्तेमाल नहीं करने दिया जिस पर पता नहीं क्यों उन्होंने अपने अधिकार छोड़ दिए।

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ईरान की तीखी प्रतिक्रिया और चेतावनी

दूसरी ओर, ईरान ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है और इसके गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्टार्मर पर अमेरिकी सेना को ब्रिटिश ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति देकर ब्रिटिश नागरिकों की जान खतरे में डालने का आरोप लगाया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अरागची ने लिखा: ब्रिटेन के अधिकांश लोग ईरान पर थोपे गए इजरायल-अमेरिका युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं। अपने ही लोगों की अनदेखी करते हुए, मिस्टर स्टार्मर ईरान के खिलाफ आक्रामकता के लिए ब्रिटेन के ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देकर ब्रिटिश नागरिकों की जान खतरे में डाल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तेहरान इस कदम के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग करेगा।

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