CEC के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज, दोनों सदनों के स्पीकर ने ठुकराया प्रस्ताव
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो गया है। राज्यसभा के स्पीकर ने प्रस्ताव ठुकरा दिया है। बता दें कि यह पहली बार था जब मौजूदा चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज हो गया है। राज्यसभा के स्पीकर ने प्रस्ताव ठुकरा दिया है। बता दें कि यह पहली बार था जब मौजूदा चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर कुल 193 सांसदों ने साइन किया था। इसमें लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों ने साइन किया था।वहीं, लोक सभा अध्यक्ष ने सीईसी के रूप में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष द्वारा प्रस्ताव लाने के लिए अलग नोटिस को भी खारिज कर दिया। राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि उच्च सदन के सभापति सीपी राधाकृष्ण ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विपक्षी सदस्यों द्वारा दिए गए नोटिस को अस्वीकार कर दिया है।
12 मार्च को लाया गया था प्रस्ताव
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ यह प्रस्ताव 12 मार्च को राज्यसभा में लाया गया था। इस पर काफी विचार-विमर्श के बाद और मूल्यांकन करने के बाद सभापति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
10 पेज की नोटिस में मुख्य चुनाव पर कार्यपालिका के प्रति आज्ञाकारी होने और संवैधानिक पद और शक्तियों के जानबूझकर और इरादतन दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए गए थे। बता दें कि विपक्ष एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर का उद्देश्य, उसके समर्थकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना है।
लोकसभा सचिवालय ने क्या कहा
लोकसभा सचिवालय ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5), मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 की धारा 11(2) और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत लोकसभा के 130 सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित 12 मार्च, 2026 के एक प्रस्ताव संबंधी नोटिस लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की गई थी।
सचिवालय ने कहाकि प्रस्ताव के नोटिस पर उचित विचार करने और उसमें शामिल सभी प्रासंगिक पहलुओं और मुद्दों के सावधानीपूर्वक और वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन के बाद, लोकसभा अध्यक्ष ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत उन्हें प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, प्रस्ताव के उक्त नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।




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