illegal Bangladeshi migrants gathered Hakimpur checkpost West Bengal government policy ‘प्यार के लिए बांग्लादेश से भागकर आई, शादी के 2 साल बाद पति ने छोड़ दिया; बंगाल सरकार लौटा रही’, India News in Hindi - Hindustan
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‘प्यार के लिए बांग्लादेश से भागकर आई, शादी के 2 साल बाद पति ने छोड़ दिया; बंगाल सरकार लौटा रही’

सुमैया खातून अपनी दो साल की बेटी के साथ बांग्लादेश लौट रही है। उसने कहा, ‘मैं यहां रहना चाहती हूं, लेकिन कोई मुझे रहने नहीं दे रहा, इसलिए वापस जा रही हूं। मेरे माता-पिता और भाई-बहन परिवार में हैं। मैं यहां अकेली हूं।’

Sat, 30 May 2026 04:50 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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‘प्यार के लिए बांग्लादेश से भागकर आई, शादी के 2 साल बाद पति ने छोड़ दिया; बंगाल सरकार लौटा रही’

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से 'डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट' नीति लागू किए जाने के बाद हाकिमपुर चेकपोस्ट पर बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी प्रवासी जमा हो गए। ये प्रवासी कई सालों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में रह रहे थे। उन्होंने कानूनी कार्रवाई, जेल जाने और भारी जुर्माने के डर को अपना वापस लौटने का मुख्य कारण बताया। एक प्रवासी ने कहा, 'मैं यहां एक साल पहले आया था। मैंने अपने दोस्त से पूछा था कि यहां काम मिलेगा या नहीं, उसने कहा हां, इसलिए मैं बांग्लादेश से यहां आया।'

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अब्दुल 2017 से राज्य में रह रहा है। उसने कहा, ‘हमारे पास यहां कोई दस्तावेज नहीं है। मैं 2017 में आया था। अब 2026 है, यानी 9 साल हो गए। मौजूदा सरकार की नीति है कि बिना दस्तावेज वाले व्यक्ति यहां नहीं रह सकते, वरना जेल और जुर्माना होगा। हमारे पास जुर्माना भरने के पैसे नहीं हैं। हमारे पास कोई दस्तावेज नहीं है। हम यहां गेस्ट हाउस की तरह रहते थे। शुरू में हम किराया नहीं दे पाते थे, लेकिन कुछ स्थानीय मुसलमानों ने हमारी मदद की। एक बार नगरपालिका चुनाव के दौरान हमारा नाम पुकारा गया। हम लाइन में भी खड़े हुए, लेकिन सामने नहीं आए।’

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अब्दुल ने बताई अपनी कहानी

अब्दुल ने दावा किया कि स्थानीय राजनीतिक तत्वों को पहले उनकी मौजूदगी की जानकारी थी। उन्होंने कहा, ‘काउंसलर को हमारे बारे में पता नहीं था, लेकिन पार्टी के लोग जानते थे और किसी ने हमें वापस जाने को नहीं कहा। आप बांग्लादेश से हैं। भाजपा सरकार आने के बाद हमें मजबूरन जाना पड़ रहा है। पहले जब दीदी (ममता बनर्जी) थीं, तो कोई समस्या नहीं थी। हम बरासत में रहते थे, रिक्शा चलाते थे। पिछले तीन-चार साल में कभी कोई समस्या नहीं हुई। दीदी के समय बेहतर था। अब नई सरकार आने के बाद डर के मारे हम जा रहे हैं। मैं अकेला हूं और अपनी जान की चिंता है, इसलिए बांग्लादेश अपने घर लौट रहा हूं। यहां मेरा कोई दस्तावेज नहीं है, सिर्फ बांग्लादेश का दस्तावेज है।’

सुमैया खातून कैसे आई भारत

सुमैया खातून अपनी दो साल की बेटी के साथ बांग्लादेश लौट रही है। उसने कहा, ‘मैं यहां रहना चाहती हूं, लेकिन कोई मुझे रहने नहीं दे रहा, इसलिए वापस जा रही हूं। मेरे माता-पिता और भाई-बहन परिवार में हैं। मैं यहां अकेली हूं। मेरा पति दूसरी लड़की के साथ चला गया। मेरे पति ने कहा कि तुम बांग्लादेशी हो, वापस जाओ। इसलिए मैं जा रही हूं। हम दो साल पहले फेसबुक पर मिले थे। हम फोन पर बात करते थे। मैं बॉर्डर पार करके आई। हमारा मैरिज मध्यमग्राम में एक मंदिर में हुआ था।’

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अवैध एंट्री के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, 'दो साल पहले एक ब्रोकर ने मुझे बॉर्डर पार करवाया, उसने 15000 रुपये लिए। मैंने घर से बिना बताए यह पैसा लिया था। शादी के बाद मैंने दस्तावेज बनवाने की कोशिश की, लेकिन काम नहीं बना। अब मैं वापस जा रही हूं। मेरी मां वहां मेरा इंतजार कर रही है। मैं अपने पति को कभी नहीं देखूंगी और न ही उससे बात करूंगी। मेरी दो साल की बेटी भी है।' 23 मई को जारी निर्देश में अधिकारियों को गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या मुसलमानों को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया अपनाने को कहा गया है।