Does God wait for ministers Madras High Court questions VIPs in temples मंत्रियों के लिए इंतजार करते हैं क्या भगवान? मंदिरों में VIP दर्शन पर हाई कोर्ट ने उठाए सवाल, India News in Hindi - Hindustan
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मंत्रियों के लिए इंतजार करते हैं क्या भगवान? मंदिरों में VIP दर्शन पर हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

मद्रास हाई कोर्ट ने मंदिरों में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। पीठ ने कहा कि भगवान के सामने मंत्री, विधायक और आम जनमानस में कोई फर्क नहीं है। ऐसे में विधायकों या मंत्रियों को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह कभी भी मंदिर जा सकते हैं।

Sat, 30 May 2026 03:59 PMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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मंत्रियों के लिए इंतजार करते हैं क्या भगवान? मंदिरों में VIP दर्शन पर हाई कोर्ट ने उठाए सवाल

MANDIR VIP DARSHAN: भारत में लगभग हर मंदिर में वीआईपी दर्शन की लाइन अलग होती है। कुछ पैसे देने के बाद आप लंबी लाइनों से बचकर सीधे भगवान के दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं। हालांकि, कई बार इस पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसा ही एक मामला, मद्रास हाई कोर्ट भी पहुंचा। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट में मंदिरों में पैसे के आधार पर दी जाने वाली विशेष सुविधा पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि भगवान के सामने मंत्री या आम आदमी में कोई भेद नहीं है। उनके सामने सभी बराबर हैं। ऐसे में वीआईपी दर्शन का कोई औचित्य नहीं है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जी आर स्वामीनाथन और जस्टिस लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने मंदिरों में वीआईपी दर्शन के मामले की सुनवाई के दौरान तीखे सवाल उठाए। मंदिरों में वीआईपी दर्शन की प्रथा पर सवाल उठाते हुए हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या भगवान के सामने मंत्री और एक आम जन में फर्क है? कोर्ट ने कहा कि कोई भी प्रक्रिया है, इससे आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा, "मंत्रियों और विधायकों को यह नहीं सोचना चाहिए कि मंदिर में भगवान उनका इंतजार कर रहे हैं, और वह किसी भी समय मंदिर जा सकते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। आखिर हमें वीआईपी दर्शन की क्या आवश्यकता है? ईश्वर के समक्ष को सभी लोग समान हैं। उसमें फिर क्या मंत्री और क्या आम जनता।"

कोर्ट के इस सवाल पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी वी बालासुब्रमण्यम ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि इस तरह की प्रथा का पालन करने से लंबी-लंबी कतारों से मुक्ति मिलती है, दूसरी तरफ इससे मंदिरों को भी काफी आय होती है। अपनी इस दलील के साथ ही उन्होंने पूरा जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकार करते हुए छह सप्ताह का समय दिया है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह पूरा विवाद हाल ही में विजय सरकार में मंत्री बने आर निर्मल कुमार के दौरे को लेकर है। उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने दर्शन के लिए तिरुपरनकुंड्रम स्थित सुब्रमण्य स्वामी मंदिर को बंद करवा दिया था। इसके बाद जब उन्होंने दर्शन कर लिए उसके बाद मंदिर खोला गया। विपक्ष के इन आरोपों को विजय सरकार ने खारिज किया है।

मद्रास हाई कोर्ट में यह मामला विश्व हिंदू परिषद तमिलनाडु ईकाई के नेता पी, चोकलिंगम की याचिका पर शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि निर्मल कुमार की तरह ही कई बार मंत्री और विधायक मंदिरों में वीआईपी दर्शन के लिए जाते हैं, जिसकी वजह से आम जनता को काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में धन, सामाजिक स्थिति या जाति के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देता है और सभी भक्तों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।

हालांकि, चोकलिंगम ने अपनी याचिका में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं, नवविवाहित जोड़ों, मंदिर में सेवा करने वाले कलाकारों, राष्ट्राध्यक्षों और संवैधानिक अधिकारियों सहित कुछ श्रेणियों के लिए छूट की मांग की।