If DNA Test Proves Man Is Not the Father He Need Not Bear Child Expenses Supreme Court verdict DNA टेस्ट में पिता नहीं निकले, तो नहीं देना होगा बच्चे को गुजारा; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, India News in Hindi - Hindustan
More

DNA टेस्ट में पिता नहीं निकले, तो नहीं देना होगा बच्चे को गुजारा; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

बेंच ने कहा, 'इस मामले में DNA टेस्ट पहले ही किया जा चुका है। जिस व्यक्ति ने अपील की है, उसने न केवल इस टेस्ट के लिए अपनी सहमति दी थी, बल्कि इसकी रिपोर्ट के नतीजों पर कभी कोई सवाल भी नहीं उठाया। दूसरे शब्दों में, यह रिपोर्ट अब पूरी तरह से अंतिम और मान्य हो चुकी है।'

Thu, 23 April 2026 07:09 AMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
share
DNA टेस्ट में पिता नहीं निकले, तो नहीं देना होगा बच्चे को गुजारा; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष न्यायालय का कहना है कि अगर DNA टेस्ट से साबित हो जाता है कि शख्स बच्चे का बायोलॉजिकल पिता नहीं है, तो उसे गुजारा देने के निर्देश नहीं दिए जा सकते। कोर्ट ने कहा कि फिर भले ही बच्चे का जन्म शादी के दौरान ही क्यों न हुआ हो। इसके साथ ही अदालत ने महिला की तरफ से दाखिल अपील को खारिज कर दिया।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच महिला की अपील पर सुनवाई कर रही थी। महिला ने बेटी को गुजारा देने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। इस दौरान अदालत ने इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 (भारतीय साक्ष्य अधिनियम में धारा 116) और पिता का पता करने लिए होने वाली आधुनिक जांचों के बीच संबंध पर चर्चा की गई।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:पीएम के राष्ट्र के नाम संबोधन को SC में चुनौती, कांग्रेस नेता ने दायर की याचिका

इन फैसलों का किया जिक्र

अदालत ने अपर्णा अजिंक्य फिरोदिया बनाम अजिंक्य अरुण फिरोदिया के 2023 फैसले का जिक्र किया। इसमें अदालत ने कहा था कि DNA जांच के रूटीन तौर पर आदेश नहीं दिए जाने चाहिए। साथ ही 2025 के इवान रतिनम बनाम मिलान जोसेफ का भी जिक्र किया था। खास बात है कि मौजूदा बेंच का भी मानना था कि DNA जांच के आदेश सतर्कता के साथ ही दिए जाने चाहिए।

बेंच ने कहा, 'इन सभी पुराने फैसलों में एक बात समान रही है कि जजों ने हमेशा DNA टेस्ट का आदेश देने या उसे मंजूरी देने में सावधानी और हिचकिचाहट दिखाई है। हम इस रुख से पूरी तरह सहमत हैं।' हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि हालात बदलते हैं और डीएनए टेस्ट पहले ही हो चुका है और रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। ऐसे में बेंच ने कहा कि मौजूदा केस पिछले मामलों से अलग है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:'भरोसा नहीं हो रहा', धीरेंद्र शास्त्री से मिले पूर्व CJI गवई; भड़के प्रशांत भूषण

सुप्रीम कोर्ट का तर्क

बेंच ने कहा, 'इस मामले में DNA टेस्ट पहले ही किया जा चुका है। जिस व्यक्ति ने अपील की है, उसने न केवल इस टेस्ट के लिए अपनी सहमति दी थी, बल्कि इसकी रिपोर्ट के नतीजों पर कभी कोई सवाल भी नहीं उठाया। दूसरे शब्दों में, यह रिपोर्ट अब पूरी तरह से अंतिम और मान्य हो चुकी है।'

अदालत ने नंदलाल वासुदेव बडवाइक बनाम लता नंदलाल बडवाइक के केस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा मामले की स्थिति ऐसी ही है। इससे साफ हो गया था कि वैज्ञानिक सबूत (DNA टेस्ट) और कानूनी अनुमान के बीच टकराव हो, तो जीत विज्ञान की होनी चाहिए। इस आधार पर कोर्ट ने कहा कि बच्चे को गुजारा नहीं देने के फैसले में कोई गलती नहीं हुई है।

राहत भी दी

कोर्ट ने महिला की अपील खारिज कर दी, लेकिन महिला एवं बाल विकास को बच्चे के हालात की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कमी पाए जाने पर उपाय करने के लिए भी कहा है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जूडिशरी को क्या संदेश दे रहे? बागेश्वर धाम पहुंचे पूर्व CJI तो भड़के वरिष्ठ वकील

DNA रिपोर्ट से खुला राज

कपल की शादी 2016 में हुई थी, लेकिन दोनों के बीच विवाद हुए। बाद में महिला ने अपने और बच्चे के लिए गुजारा की मांग की थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रतिवादी (पति) ने डीएनए टेस्ट की मांग की थी। मजिस्ट्रेट ने इसकी अनुमति दी और रिपोर्ट से साबित हुआ कि वह बच्चे का पिता नहीं है। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने बच्चे के लिए गुजारा देने की अपील को खारिज कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने भी आदेश को बरकरार रखा था।