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पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, कांग्रेस नेता ने दायर की याचिका

कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद टीएन प्रतापन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 अप्रैल को दूरदर्शन पर राष्ट्र के नाम संबोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में इस संबोधन को आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।

Wed, 22 April 2026 07:34 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, कांग्रेस नेता ने दायर की याचिका

कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद टीएन प्रतापन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 अप्रैल को दूरदर्शन पर राष्ट्र के नाम संबोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में इस संबोधन को आदर्श चुनाव आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने 18 अप्रैल की रात करीब 8:30 बजे दूरदर्शन और संसद टीवी पर राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। यह संबोधन नारी शक्ति वंदन विधेयक (महिला आरक्षण संशोधन विधेयक) से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के ठीक बाद आया था। भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने नाम लेकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों की आलोचना की तथा उन्हें महिला आरक्षण के विरोधी बताते हुए मतदाताओं से जवाबदेही ठहराने की अपील की।

याचिकाकर्ता टीएन प्रतापन का आरोप है कि सक्रिय चुनाव अवधि के दौरान सरकारी नियंत्रण वाले दूरदर्शन और संसद टीवी का इस्तेमाल विपक्षी दलों की आलोचना के लिए किया गया, जो आदर्श आचार संहिता का साफ उल्लंघन है। प्रतापन ने याचिका में आगे कहा कि चुनाव के दौरान पक्षपातपूर्ण राजनीतिक संदेश देने के लिए सरकारी प्लेटफॉर्म्स का उपयोग आधिकारिक मशीनरी का दुरुपयोग है और यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(7) के तहत भ्रष्ट आचरण माना जा सकता है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को औपचारिक शिकायत दिए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे आयोग की अनुच्छेद 324 के तहत संवैधानिक जिम्मेदारी का परित्याग हुआ है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपता है।

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बता दें कि 18 अप्रैल को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर चर्चा हुई, जिसमें लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव था। सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर अतिरिक्त सीटें सृजित करने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष ने मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्वितरण के बिना आरक्षण लागू करने की मांग की। विधेयक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और असफल हो गया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लगभग 30 मिनट के संबोधन में विधेयक की हार के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया और इसे महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के खिलाफ 'भ्रूणहत्या' जैसा कृत्य बताया। उन्होंने भाषण का समापन मतदाताओं से विपक्ष को जवाबदेह ठहराने की अपील के साथ किया।

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याचिका में तर्क दिया गया कि इस संबोधन से असमान चुनावी माहौल बना, क्योंकि सत्तारूढ़ दल को सरकारी मीडिया के जरिए विपक्ष की आलोचना करने का मौका मिला, जबकि अन्य उम्मीदवार MCC के सख्त नियमों से बंधे रहे। वर्तमान में केरल विधानसभा चुनाव में मनालूर सीट से उम्मीदवार टीएन प्रतापन ने याचिका में चुनाव आयोग को MCC और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई का निर्देश देने की मांग की है। बता दें कि यह याचिका अधिवक्ता सुविदत्त एमएस के माध्यम से दायर की गई है।