I do not want to open history book why Calcutta High Court Judge slams Abhishek Banerjee during hearing gave big relief पुरानी करतूतों के पुलिंदों पर मेरा मुंह मत खुलवाइए, अभिषेक बनर्जी पर क्यों तमतमाए मीलॉर्ड?, India News in Hindi - Hindustan
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पुरानी करतूतों के पुलिंदों पर मेरा मुंह मत खुलवाइए, अभिषेक बनर्जी पर क्यों तमतमाए मीलॉर्ड?

शिकायत में कहा गया है कि अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दी थी। दूसरी तरफ जस्टिस भट्टाचार्य ने बनर्जी द्वारा 'गैर-जिम्मेदाराना बयान' दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर तृणमूल चुनाव जीत जाती तो क्या होता।

Thu, 21 May 2026 04:28 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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पुरानी करतूतों के पुलिंदों पर मेरा मुंह मत खुलवाइए, अभिषेक बनर्जी पर क्यों तमतमाए मीलॉर्ड?

कलकत्ता हाई कोर्ट ने आज (गुरुवार, 21 मई को) तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और महासचिव अभिषेक बनर्जी को पिछले महीने एक जनसभा में दिए गए उनके बयानों को लेकर दर्ज प्राथमिकी में 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से छूट देते हुए संरक्षण प्रदान किया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी सांसद के लिए इस तरह के अनुचित बयान देना सही है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने TMC महासचिव बनर्जी को जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी द्वारा भेजे गए नोटिसों का अनुपालन करने का भी निर्देश दिया।

अदालत ने उन्हें न्यायालय की अनुमति के बिना विदेश यात्रा न करने का भी निर्देश दिया है। डायमंड हार्बर से सांसद बनर्जी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उस प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया था, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले 27 अप्रैल को एक जनसभा में प्रतिद्वंद्वी दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दिए गए उनके बयानों को लेकर दर्ज की गई थी। वरिष्ठ वकील कल्याण बंदोपाध्याय अभिषेक बनर्जी की पैरवी कर रहे थे। सुनवाई के दौरान अपने तर्क में बंदापाध्याय ने पुलिस में दर्ज शिकायत को पढ़ते हुए कहा कि यह सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद दुर्भावनापूर्ण अभियोजन है।

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अमित शाह को धमकी दी गई थी?

इस शिकायत में कहा गया है कि अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी दी थी। दूसरी तरफ जस्टिस भट्टाचार्य ने बनर्जी द्वारा 'गैर-जिम्मेदाराना बयान' दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर तृणमूल चुनाव जीत जाती तो क्या होता। जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी कहा, ''इस राज्य का चुनाव के बाद हिंसा का पुराना इतिहास रहा है।'' इस पर अभिषेक बनर्जी के वकील कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि राजनीतिक इतिहास को दूसरे नज़रिए से भी देखा जा सकता है।

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जज-वकील में देर तक चली बहस

बार एंड बेंच के मुताबिक, इसके बाद बंदोपाध्याय और जस्टिस भट्टाचार्य के बीच लंबे समय तक बहस होती रही। इसके बाद कोर्ट ने पूछा कि क्या ऐसे राजनीतिक बयान, या कथित अपमानजनक टिप्पणियाँ ज़रूरी थीं? इस पर बंदोपाध्याय ने कहा, "आपने देखा होगा कि चुनाव के दौरान एक सांसद की पिटाई हुई थी।" इस पर जस्टिस भट्टाचार्य ने अभिषेक बनर्जी की पेरवी कर रहे बंदोपाध्याय से दो टूक कहा, "पहले भी ऐसा हुआ है, लेकिन मैं पुरानी करतूतों के पुलिंदों की किताबें नहीं खोलना चाहता।" कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बहुत उम्मीदों के साथ जनता ने राजनीतिक बदलाव लाया है। आगे समय ही बताएगा।

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31 जुलाई तक मिली राहत

जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी सवाल पूछा कि क्या सार्वजनिक सभा में बनर्जी के बयान तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के पद की गरिमा के अनुरूप थे। हालांकि, अदालत ने उन्हें 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देते हुए कहा कि वह 20 जुलाई को इस मामले की फिर से सुनवाई करेगी। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने बनर्जी की याचिका का विरोध किया, लेकिन यह भी कहा कि जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।