बंगाल में कंगाल और तमिलनाडु में करारी हार, फिर भी क्यों खुश होगी कांग्रेस; दो वजहें
पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक अब कांग्रेस खुद को अपने दम पर स्थापित करना चाहेगी। भले ही राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी INDIA अलायंस इससे कमजोर होगा, लेकिन कांग्रेस के लिए उम्मीदें जिंदा हुई हैं। अब उसके नेता राहुल गांधी के पास देश भर में नेता विपक्ष के तौर पर स्थापित होने का मौका रहेगा।

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को महज 2 सीटें ही मिली हैं। इसके अलावा तमिलनाडु में वह 4 सीटें ही जीत पाई है। इसी राज्य में उसे 2021 के चुनाव में 18 पर जीत हासिल हुई थी। इस तरह देखें तो दोनों ही राज्यों से कांग्रेस के हाथ निराशा लगी है। फिर भी एक वजह से वह खुश होगी। वह यह कि यहां ममता बनर्जी और एमके स्टालिन जैसे दिग्गज नेता हार गए हैं। ये दोनों ही नेता सत्ता खोने के साथ ही अपनी सीटें भी गंवा बैठे। अब दोनों के विधानसभा से ही बाहर हो जाने के बाद इन नेताओं का इकबाल भी कम हुआ है। खासतौर पर INDIA अलायंस में इनका वजन कम होगा, जिसका नेता बनने की भी अकसर इनके समर्थक महत्वाकांक्षा जाहिर करते थे।
कांग्रेस के लिए यही राहत की बात है और अब उसके नेता राहुल गांधी के पास देश भर में नेता विपक्ष के तौर पर स्थापित होने का मौका रहेगा। अकसर चुनावी हारों के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठते थे। यह कहा जाता था कि विपक्षी INDIA अलायंस की कमान ही एमके स्टालिन या फिर ममता बनर्जी जैसे नेता को मिलनी चाहिए। अब दोनों ही नेता हार गए हैं तो अब उनकी दावेदारी भी स्वत: समाप्त है। इसके अलावा बिहार में आरजेडी, यूपी में सपा और बसपा पहले ही काफी कमजोर स्थिति में हैं। महाराष्ट्र में एनसीपी-एसपी की भी हालत पतली है। ऐसे में कांग्रेस ही एक ऐसा दल है, जो सही मायनों में विपक्षी गठबंधन की धुरी बनने का दम रखती है।
बंगाल में कांग्रेस को इस बार दो सीटें मिली हैं, जबकि 2021 में तो वह शून्य पर ही ठहर गई थी। ऐसे में कांग्रेस के पास बंगाल में फिर से खुद को स्थापित करने का चांस रहेगा। टीएमसी की करारी हार के बाद भाजपा के मुकाबले विपक्ष के तौर पर सड़क से सदन तक यदि कांग्रेस संघर्ष करती है तो आने वाले वक्त में उसके पास मौका होगा।
अब बंगाल में खुलकर खेल पाएगी कांग्रेस
टीएमसी के रहते कांग्रेस कभी खुलकर नहीं खेल पाई। ऐसे में अब भाजपा के खिलाफ कांग्रेस भी खुद को स्थापित करना चाहेगी। इस लिहाज से बंगाल में विपक्ष की जमीन हथियाने के लिए भी टीएमसी और कांग्रेस के बीच संघर्ष दिख सकता है। ऐसी स्थिति भले ही व्यापक तौर पर INDIA अलायंस को कमजोर करेगी, लेकिन कांग्रेस के लिए निजी तौर पर यह अच्छी स्थिति है। यूं भी राहुल गांधी ज्यादातर राज्यों में जमीन से शुरुआत करने की बात करते रहे हैं।




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