Supreme court on SIR ahead of West Bengal elections to consider plea against EC decision to freeze electoral rolls ये तो संवैधानिक हक है; बंगाल चुनाव से पहले SIR मामले में SC का बड़ा बयान, नाम डिलीट होने वालों का क्या?, India News in Hindi - Hindustan
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ये तो संवैधानिक हक है; बंगाल चुनाव से पहले SIR मामले में SC का बड़ा बयान, नाम डिलीट होने वालों का क्या?

पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। सभी सीटों के लिए मतगणना चार मई को होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने SIR के मुद्दे पर अहम टिप्पणियां की हैं।

Fri, 10 April 2026 03:01 PMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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ये तो संवैधानिक हक है; बंगाल चुनाव से पहले SIR मामले में SC का बड़ा बयान, नाम डिलीट होने वालों का क्या?

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मामला गरमाया हुआ है। इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में इस मामले का जिक्र हुआ। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के सामने इस मामले को उठाया गया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मतदान करना संवैधानिक अधिकार है और यह किसी भी अन्य चीज से ज्यादा महत्वपूर्ण है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को 'फ्रीज' करने को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं के साथ एक नई याचिका पर 13 अप्रैल को सुनवाई करने पर भी सहमति जताई है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ से एक वकील ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया गया था। वकील ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ कई अपीलें अब भी लंबित हैं, जबकि आयोग ने नौ अप्रैल को सूची को फ्रीज कर दिया है। इस पर सीजेआई ने कहा, ''हम 13 अप्रैल को इस याचिका पर विचार करेंगे।''

मतदाता सूची हुई फ्रिज

बता दें कि निर्वाचन आयोग ने उन विधानसभा सीटों के लिए मतदाता सूची को फ्रीज कर नौ अप्रैल को अंतिम रूप दे दिया है जिन पर पहले चरण में मतदान होने हैं। मतदाता सूची को फ्रीज करने का मतलब है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें इस विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची में दोबारा शामिल नहीं किया जा सकता।

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याचिकाकर्ता की क्या दलील?

याचिकाकर्ता ने उच्चतम न्यायालय में दलील दी है कि अब भी कई आवेदनों पर सुनवाई बाकी हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने 9 अप्रैल को मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया है, जो मतदाताओं के साथ अन्याय है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे। वहीं मतगणना चार मई को होगी।

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वोट देना संवैधानिक अधिकार

इस दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि फ्रीज करने की तारीख नौ अप्रैल थी और इसके बाद किसी को शामिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, ''मतदान का अधिकार बना हुआ है, इन अपीलकर्ताओं की स्थिति भी वैसी है जिनकी अपील स्वीकार की गई थीं।''

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इस पर जस्टिस बागची ने कहा, ''इसकी संरचना क्या थी, हम इस पर विचार कर रहे हैं। चुनाव के संदर्भ में एक कट-ऑफ तारीख होती है, लेकिन इसके पीछे मतदाता सूची में शामिल होने और भविष्य के चुनावों में वोट देने का संवैधानिक अधिकार है, जो कहीं अधिक महत्वपूर्ण और स्थायी है।'' वहीं सीजेआई ने भी भरोसा दिलाया कि किसी व्यक्ति को स्थायी रूप से मतदान से वंचित नहीं किया जा रहा है।