ईरान संकट के बीच सरकार बनी आम आदमी की ढाल, टैक्स कटौती की वजह से करोड़ों का नुकसान
ईरान युद्ध की वजह से बढ़ते ऊर्जा संकट को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल से उत्पाद शुल्क में कटौती की है। CBIC चीफ के मुताबिक सरकार के इस कदम से अगले दो हफ्तों में राजस्व को करीब 7000 करोड़ का नुकसान होगा।

पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। कच्चे तेल की कम होती सप्लाई और बढ़ते दामों का बोझ आम आदमी के ऊपर आना तय माना जा रहा था। ऐसे समय में केंद्र सरकार जनता के दर्द को कम करते हुए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क को 10 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से कम कर दिया है। पश्चिम एशिया के दर्द से जनता को बचाने के लिए सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले का असर राजस्व पर पड़ना तय है। सीबीआईटीसी मुताबिक इस फैसले की वजह से सरकार को अगले 15 दिनों में 7 हजार करोड़ का नुकसान होगा।
पेट्रोल और डीजल के ऊपर से उत्पाद टैक्स हटाने का यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब ईरान युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कल देर रात हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालात की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय कीमतों का असर जनता के ऊपर न पड़े। इसके कुछ देर बाद ही वित्त मंत्रालय ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की घोषणा कर दी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया साइट पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, "पश्चिम एशिया संकट को ध्यान में रखते हुए घरेलू स्तर पर इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले केद्रीय उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई है। इससे ग्राहकों को सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा यह सुनिश्चित करते हैं कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिले।"
सरकार को करोडों का नुकसान: CBIC चेयरमैन
इसके बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) चैयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि इस कटौती से सरकार को अगले 15 दिनों में 7 हजार करोड़ का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि इस कदम के जरिए तेल वितरित करने वाली कंपनियों के घाटे को कम करने में मदद मिलेगी और जनता के ऊपर अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों का बोझ नहीं पड़ेगा। चतुर्वेदी से जब इस फैसले की वजह से राजस्व के ऊपर होने वाले प्रभाव के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम एक कठिन समय में है, सरकार इस पर लगातार नजर बनाए हुए है।
डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क बढ़ाया: CBIC चेयरमैन
घरेलू उपयोग के अलावा भारत बड़ी मात्रा में डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का निर्यात भी करता है। वैश्विक ऊर्जा संकट की स्थिति में निर्यात को रोकने और घरेलू आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने निर्यात टैक्स में वृद्धि की है। सीबीआईसी चीफ ने बताया कि सरकार ने डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया है, ताकि निर्यात को हतोत्साहित किया जा सके और घरेलू आपूर्ति बढ़ाई जा सके।
आपको बता दें, सरकार की तरफ से यह फैसले ऐसे समय में लिए गए हैं, जब ईरान युद्ध की वजह से अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतें इस महीने लगभग 50% बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद जमीनी स्तर पर ईंधन कीमतें स्थिर रखी गईं, जिससे तेल कंपनियों को भारी घाटा हुआ है। इस दबाव को कम करने के लिए सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती की। यह कटौती पेट्रोल पर 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर की संभावित वृद्धि के असर को संतुलित करने के लिए की गई है।




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