राफेल डील को लेकर बड़ी बात बोल गए मैक्रों, कहा- समझ नहीं आता आखिर...
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत के साथ हुई राफेल विमानों की डील को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का अहम अंग बताया। उन्होंने कहा कि इस डील से भारत और भी ज्यादा मजबूत होगा और यहां पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए भारत आए फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत के साथ राफेल डील का बचाव किया है। इस डील को लेकर भारत सरकार को घेरने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह डील भारत को मजबूत बनाती है, नए रोजगार पैदा करती है और इससे दोनों देशों के बीच में रणनीतिक साझेदारी और भी ज्यादा मजबूत होती है।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ शिखर सम्मेलन से पहले पत्रकारों से बात करते मैक्रों से जब राफेल डील के बारे पूछा गया। इसका जवाब देते हुए मैक्रों ने कहा कि भारत ने राफेल लड़ाकू विमानों की नई खेप की खरीद को लेकर अपनी इच्छा की पुष्टि की है। उन्होंने इसे भारत और फ्रांस के रक्षा सहयोग में एक नया कदम बताया। भारत में राफेल डील पर विवाद के बारे में पूछे जाने पर मैक्रों ने कहा, “हम हमेशा डील में भारतीय घटकों की संख्या बढ़ा रहे हैं। यह कंपनी और आपकी सरकार के बीच चल रहे संवाद का हिस्सा है। मुझे समझ नहीं आता कि लोग इसकी आलोचना क्यों और कैसे कर सकते हैं। क्योंकि इससे आपका देश मजबूत होता है। इससे हमारे देशों के बीच में रणनीतिक संबंध मजबूत होते हैं और यहां आपके देश में अधिक रोजगार पैदा होते हैं।”
राफेल के बाद पनडुब्बियों में भी बढ़ाएंगे सहयोग: मैक्रों
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि फ्रांस, इस डील के दौरान फ्रांस अधिकमत भारतीय सामानों का उपयोग करने के लिए तैयार है। मैक्रों ने कहा, "यह एक नया कदम है, जो मौजूदा सहयोग को और भी ज्यादा मजबूती के साथ आगे बढ़ाता है। राफेल बेहद महत्वपूर्ण है। मुझे उम्मीद है कि हम पनडुब्बियों के मामले में भी ऐसा ही करेंगे। हमने अतिरिक्त क्षमताएं प्रदान की हैं और इंजन तथा हेलीकॉप्टरों के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं, विशेष रूप से टाटा और एयरबस के बीच सहयोग के जरिए।”
राफेल खरीद को सरकार की मंजूरी
गौरतलब है कि मैक्रों की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब डीएसी ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 नए राफेल जेट खरीदने को मंजूरी दी है। इसमें से ज्यादातर भारत में तैयार किए जाएंगे, जबकि कुछ हमें फ्रांस से रेडी टू यूज हालत में मिलेंगे। इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए पी-8आई समुद्री गश्ती विमानों और लड़ाकू मिसाइलों की खरीद को भी मंजूरी दी गई है।
आपको बता दें, भारतीय वायुसेना लगातार इस तरह की खरीद की मांग कर रही है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है, जबकि जरूरतों के हिसाब से भारत को 42 स्क्वाड्रन किसी भी क्षण चाहिए होती है। यह पिछले कई दशकों में भारतीय वायुसेना का सबसे निचला स्तर है। फ्रांसीसी डसॉल्ट से डील करने से पहले भारत ने तेजस को भी ज्यादा मात्रा में रखने की कोशिश की थी, लेकिन उसके अमेरिकी इंजन के चलते लगातार देरी हो रही थी। इसी वजह से वायुसेना चीफ भी अपनी नाराजगी जता चुके थे।
इस सौदे के पूरा होने केबाद भारतीय वायुसेना के पास करीब 150 राफेल विमानों का बेड़ा होगा, जबकि 26 राफेल विमान भारतीय नौसेना की शान बढ़ाएंगे। आपको बता दें, पिछले कुछ समय से भारत और फ्रांस के बीच में लगातार सहयोग बढ़ा है। दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचाने का निर्णय लिया है। राफेल के अलावा भी दोनों देश कई स्तर पर एक-दूसरे का सहयोग करने के लिए तैयार हुए हैं।




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