Former CJI B R Gavai says Collegium system for time is best suited for India इस समय भारत में… कॉलेजियम सिस्टम पर देश के पूर्व CJI ने कह दी बड़ी बात, सरकार की भूमिका पर क्या बोले?, India News in Hindi - Hindustan
More

इस समय भारत में… कॉलेजियम सिस्टम पर देश के पूर्व CJI ने कह दी बड़ी बात, सरकार की भूमिका पर क्या बोले?

पूर्व सीजेआई 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन' के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कॉलेजियम सिस्टम जैसे कई गंभीर मुद्दों पर अपनी राय रखी।

Mon, 23 March 2026 07:56 AMJagriti Kumari भाषा, बेंगलुरु
share
इस समय भारत में… कॉलेजियम सिस्टम पर देश के पूर्व CJI ने कह दी बड़ी बात, सरकार की भूमिका पर क्या बोले?

देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई ने रविवार को कहा है कि जजों की नियुक्ति के लिए मौजूदा समय में कॉलेजियम प्रणाली ही भारत के लिए सबसे उपयुक्त है। पूर्व CJI 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन' के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान 'न्यायिक शासन की पुनर्कल्पना' विषय पर बोलते हुए गवाई ने कई अहम मुद्दों पर बात की।

पूर्व CJI ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ''कॉलेजियम के कामकाज के संबंध में एक मुद्दा उठाया गया था। मैं यह नहीं कहूंगा कि कॉलेजियम प्रणाली एक त्रुटिहीन प्रणाली है। कोई भी प्रणाली परिपूर्ण नहीं हो सकती। हर प्रणाली के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। लेकिन इतने वर्षों तक काम करने के बाद, मुझे लगता है कि कम से कम फिलहाल के लिए, कॉलेजियम प्रणाली हमारे देश के लिए सबसे उपयुक्त है।''

'कॉलेजियम ही सबसे सही'

जस्टिस गवई ने आगे कहा कि कॉलेजियम मनमाने ढंग से काम नहीं करता है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों की कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की जाती है, और उसके बाद यह केंद्र सरकार को भेजा जाता है। उन्होंने कहा, ''केंद्र सरकार, खुफिया विभाग और सभी पक्षों से सुझाव एकत्र किए जाते हैं, और उसके बाद उच्चतम न्यायालय की कॉलेजियम अंतिम निर्णय लेती है। नामों को भेजे जाने के बाद भी अगर सरकार या कार्यपालिका को कोई आपत्ति होती है, तो उन आपत्तियों को कॉलेजियम के समक्ष रखा जाता है। कॉलेजियम आपत्तियों पर विचार करता है और उसके बाद अंतिम फैसला किया जाता है।''

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जजों को भी नहीं पता कॉलेजियम की बैठक कहां होती है, SC के जस्टिस ने खड़े किए सवाल

वहीं हाईकोर्ट के जजों की स्वीकृत संख्या और जजों की नियुक्तियों के बीच भारी अंतर पर पूर्व CJI ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कई बार अपने फैसले में कहा है कि कॉलेजियम द्वारा दूसरी बार सिफारिश किए जाने पर कार्यपालिका नियुक्ति करने के लिए बाध्य है। लेकिन मुझे यह खेद है कि कई ऐसे नाम हैं, जिन्हें दूसरी सिफारिश के बाद भी कार्यपालिका ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। यह आरोप-प्रत्यारोप का खेल नहीं है, पर इस मुद्दे को मुझे उठाना ही होगा।''

हाईकोर्ट के जज कमतर नहीं- गवई

जजों के ट्रांसफर के संबंध में बात करते हुए जस्टिस गवई ने कहा कि दोनों ही संवैधानिक पदाधिकारी हैं, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में स्थानांतरण करना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा, ''मैं एक प्रश्न पूछता हूं कि यदि कोई विशेष न्यायाधीश एक से अधिक अवसरों पर उच्चतम न्यायालय के निर्णयों की अवहेलना करता है, और किसी मामले में शीर्ष अदालत द्वारा स्पष्ट किए गए विचारों के विपरीत रुख अपनाता है, तो क्या कॉलेजियम को शांत बैठना चाहिए या सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए? चूंकि बार (अधिवक्ता संघ) न्यायाधीशों की जननी है, इसलिए मैं यह मुद्दा बार के समक्ष रखना चाहता हूं।''

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:पद खाली होने से पहले ही HC जजों का हो जाएगा तबादला, क्यों कॉलेजियम ने बनाया नियम

कार्यपालिका पर क्या बोले?

पूर्व प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अदालतें हमेशा संयम बरतती हैं, और वे अपनी शक्तियों का प्रयोग तब करती हैं जब उन्हें लगता है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है या फिर कार्यपालिका, न्यायपालिका और संसद को सौंपी गई शक्तियों के बीच के संतुलन को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''जब कार्यपालिका अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए किसी व्यक्ति के अपराधी होने के संदेह पर उसके घर ध्वस्त कर देती है, तो क्या न्यायपालिका से यह अपेक्षा की जाती है कि वह चुपचाप बैठी रहे और कार्यपालिका को ऐसे कृत्य को अंजाम देने की अनुमति दे, जो कानून के शासन पर प्रहार करता है? यह एक ऐसा प्रश्न है जिस पर विचार किया जाना चाहिए।''

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:क्रीमी लेयर का समर्थन कर घिर गए थे पूर्व CJI गवई, बोले- मेरे समुदाय ने ही…