काउंटिंग से पहले ही खो गई स्ट्रांगरूम की चाबी, हथौड़े से तोड़ना पड़ा ताला; VIDEO
मतगणना केंद्र पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, एक व्यक्ति को हथौड़े और छेनी के साथ बुलाया गया। सुरक्षा बलों और विभिन्न राजनीतिक दलों के एजेंटों की कड़ी निगरानी में स्ट्रांगरूम के ताले को तोड़ा गया।

एक केंद्र शासित प्रदेश समेत देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में नतीजों की तस्वीर आज साफ हो जाएगी। इसके साथ ही 6 अन्य राज्यों की 8 विधानसभा सीटों पर हुए उप-चुनाव के नतीजे भी आज ही आएंगे। इस बीच कर्नाटक के दावणगेरे दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के उपचुनावों की मतगणना के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई है।
मतगणना केंद्र पर ईवीएम स्ट्रांगरूम की चाबी खो जाने के कारण अधिकारियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार समय पर गिनती शुरू करने के लिए सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में स्ट्रांगरूम का ताला तोड़ना पड़ा। दावनगेरे दक्षिण विधानसभा सीट पर उपचुनाव दिग्गज नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के कारण हुआ है।
वोटों की गिनती का समय निकल जा रहा था और चाबी थी नहीं। ऐसे में अधिकारियों के सामने अजीब स्थिति पैदा हो गई। फैसला लिया गया कि ताले को ही तोड़ना पड़ेगा। सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी वायरल है। एक व्यक्ति छेनी और हथौड़ा लेकर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में छेनी हथौड़ा लेकर ताले पर जोर से कई वार कर ताला तोड़ा।
अफरा-तफरी का माहौल बन गया
मतदान के बाद ईवीएम मशीनों को सुरक्षित रखा गया था। काफी देर तक तलाश करने के बाद भी जब चाबी नहीं मिली, तो मतगणना केंद्र पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, एक व्यक्ति को हथौड़े और छेनी के साथ बुलाया गया। सुरक्षा बलों और विभिन्न राजनीतिक दलों के एजेंटों की कड़ी निगरानी में स्ट्रांगरूम के ताले को तोड़ा गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
ईवीएम जैसी संवेदनशील मशीनों के स्ट्रांगरूम की चाबी खोने की घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि इस लापरवाही के लिए किन अधिकारियों पर गाज गिरती है।
क्या होता है स्ट्रांगरूम?
स्ट्रांगरूम वह सुरक्षित कमरा या तिजोरीनुमा स्थान होता है जहां चुनाव के बाद ईवीएम और VVPAT मशीनों को मतगणना होने तक बेहद कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है। इसके बाहर कड़ी निगरानी की जाती है और सीसीटीवी कैमरा भी लगाए जाते हैं। कुछ विशेष अधिकारियों को ही इसमें जाने की अनुमति होती है। इन कमरों की निगरानी और केंद्रीय सुरक्षा बलों की कड़ी पहरा होती है, जहां बिना अनुमति प्रवेश वर्जित है। इस दौरान स्थानीय पुलिस के साथ भी सुरक्षा बल मिलकर काम करते हैं।




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