नरेंद्र मोदी की जिस हार पर खुश था विपक्ष, उसी से निकल गई बंगाल की इतनी बड़ी जीत?
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वह कर दिखाया जिसका इंतजार उसे अपने गठन के बाद से ही था। भाजपा का कमल पहली बार बंगाल में खिलता दिख रहा है। भगवा दल के इस प्रदर्शन के पीछे महिला आरक्षण बिल भी अहम बताया जा रहा है जो संसद में गिर गया था।

17 अप्रैल 2026 की शाम… संसद भवन में जो घटनाक्रम हुआ वह मोदी सरकार के 12 सालों में पहली बार हो रहा था। यह पहला मौका था जब नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से लाया गया कोई विधेयक जरूरी मत हासिल नहीं कर सका। जाहिर तौर पर यह सरकार के लिए बड़ा झटका और विपक्ष के लिए ‘जीत’ थी। संविधान संशोधन के लिए जरूरी 'अंकगणित' में सरकार को नाकाम होते देख विपक्ष ने मेजे थपथपाकर 'जश्न' भी मनाया। लेकिन भाजपा की इसी हार से उसके लिए वह जीत निकलनी बाकी थी जिसका उसे अपने गठन के बाद से ही इंतजार था।
जी हां, हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों की। दशकों के संघर्ष के बाद भाजपा ने कांग्रेस, लेफ्ट और बाद में टीएमसी के अभेद्य किले को जीत लिया है। भाजपा की इस जीत के वैसे तो कई फैक्टर हैं, पर पीएम मोदी का 'बाजीगर दांव' भी अहम है। अब तक महिला वोटर्स के सहारे 'दीदी' बंगाल पर राज करती रहीं, पर इस बार भाजपा ने आधी आबादी पर विशेष फोकस करते हुए अपनी जीत की राह खोल ली।
बिल गिरा तो भाजपा ने भुनाया मौका
पश्चिम बंगाल में वोटिंग से ठीक पहले महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए भाजपा सरकार दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई। आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण यह बिल 54 वोटों से खारिज हो गया। संसद भवन में मिली इस हार को भुनाने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कांग्रेस के साथ टीएमसी, समाजवादी पार्टी जैसे दलों को इसके लिए जिम्मेदार बताया। प्रधानमंत्री ने बताया कि किस तरह यह बिल महिलाओं को उनका अधिकार दिलाए जाने के लिए था, लेकिन इसके गिरने पर विपक्षी दलों ने जश्न मनाया। प्रधानमंत्री के अलावा भाजपा के अन्य नेताओं ने भी इसे बंगाल में बड़ा मुद्दा बनाया।
जिस तरह पश्चिम बंगाल में इस बार महिलाओं की लंबी कतारें पोलिंग बूथ के बाहर नजर आईं, उनसे यह तय था कि आधी आबादी का झुकाव जिस ओर होगा, उसी की सरकार बनेगी। राजनीतिक जानकारों का अनुमान था कि जिस तरह महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद भाजपा ने विपक्ष की घेराबंदी की है, उसका फायदा पश्चिम बंगाल में मिल सकता है। नतीजों में अब वही होता भी दिख रहा है।
और किन फैक्टर्स ने किया काम
महिला वोटर्स के अलावा पश्चिम बंगाल में ध्रुवीकरण ने भी बड़ा खेल किया है। ममता बनर्जी पर पिछले कुछ सालों से जिस तरह भाजपा मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगा रही थी उससे भगवा पार्टी के लिए माहौल बन गया था। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस चुनाव में हिंदुओं ने ठीक उस तरह एकपक्षीय मतदान किया है जिस तरह कभी मुस्लिम वोट एकमुस्त टीएमसी को मिलते रहे और हिंदू वोटों में बिखराव होता रहा। इसके अलावा एसआईआर ने भी अहम भूमिका निभाई, जिसकी वजह से फर्जी वोटर्स खत्म हो गए। केंद्रीय बलों की तैनाती ने उन हिंदुओं को भी वोट डालने के लिए सुरक्षित महौल दिया जो कभी बम-बंदूक के डर से बैलेट तक पहुंच नहीं पाते थे।
5 साल पहले 77 पर अटकी भाजपा का कमाल
पिछले चुनाव में 77 सीटों पर अटकी भाजपा ने इस बार पश्चिम बंगाल में बड़ा उलटफेर किया है। पहली बार पश्चिम बंगाल में कमल खिलना तय हो गया है। चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक, भाजपा ने टीएमसी के मुकाबले निर्णायक बढ़त बना ली है। 15 साल पहले जिस तरह ममता बनर्जी ने लेफ्ट को उखाड़ फेंका था, वही अब भाजपा करती दिख रही है।




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