'सिर के ऊपर मंडराते हैं ड्रोन और मिसाइल', कैसे LPG टैंकर लेकर भारत पहुंच रहे जहाज
आखिरकार, यह टैंकर भारत पहुंचने में सफल रहा और न्यू मैंगलोर बंदरगाह पर करीब 45,000 टन एलपीजी लेकर पहुंचा। इसी तरह एक अन्य भारतीय टैंकर ‘जग वसंत’ कांदला पोर्ट पर 47,612 टन एलपीजी लेकर पहुंचा।
ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़े खतरे का असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी साफ दिखाई दे रहा है। देश में एलपीजी की किल्लत है। इस बीच एक भारतीय ध्वज वाले एलपीजी टैंकर को सामान्यतः भारत लौटने में एक सप्ताह का समय लगता था, अभी Strait of Hormuz को पार करने में तीन गुना अधिक समय लगता है। ‘पाइन गैस’ नामक यह टैंकर यूएई के रुवाईस पोर्ट से एलपीजी लोड कर रहा था, ठीक उसी समय जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर अचानक हमला किया। इसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई।
इस टैंकर में 27 सदस्यीय चालक दल सवार था, जिन्हें अपनी यात्रा के दौरान रोजाना मिसाइल और ड्रोन ऊपर से गुजरते दिखाई दिए। जहाज के चीफ ऑफिसर सोहन लाल के अनुसार, टैंकर को 11 मार्च को रवाना होना था, लेकिन हालात बिगड़ने के कारण उसे 23 मार्च तक अनुमति नहीं मिली।
रूट बदलकर भारत पहुंचा जहाज
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहाज को सामान्य मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी गई। आईआरजीसी ने इसे ईरान के तट के पास लारक द्वीप के उत्तर में एक संकरे मार्ग से जाने को कहा। यह मार्ग जोखिम भरा था, लेकिन चालक दल की सहमति के बाद जहाज ने आगे बढ़ने का फैसला किया।
आखिरकार, यह टैंकर भारत पहुंचने में सफल रहा और न्यू मैंगलोर बंदरगाह पर करीब 45,000 टन एलपीजी लेकर पहुंचा। इसी तरह एक अन्य भारतीय टैंकर ‘जग वसंत’ कांदला पोर्ट पर 47,612 टन एलपीजी लेकर पहुंचा।
नौसेना ने दी सुरक्षा
इस पूरे अभियान में भारतीय नौसेना ने अहम भूमिका निभाई। रिपोर्ट के अनुसार, चार भारतीय युद्धपोतों ने पाइन गैस को ओमान से अरब सागर तक लगभग 20 घंटे तक सुरक्षा प्रदान की। गौरतलब है कि युद्ध के चलते एलपीजी की आपूर्ति में बाधा आने की आशंका थी, जिससे भारत में संभावित कमी को लेकर चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, इन टैंकरों के सुरक्षित पहुंचने से फिलहाल राहत मिली है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले ही स्पष्ट किया था कि ईरान ने भारतीय जहाजों को गुजरने देने के बदले कोई शुल्क या विशेष समझौता नहीं किया है। यह पूरी प्रक्रिया परिस्थितियों के अनुसार और बिना किसी ब्लैंकेट एग्रीमेंट के हुई।




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