प्रूफ दिखाइए और अमेरिका में रहिए, H1-B वीजा को लेकर भारतीयों के लिए अच्छी खबर
भारतीय एच-1बी वीजा धारकों की संख्या सबसे ज्यादा है। वित्तीय वर्ष 2025 में कुल 4 लाख से अधिक एच-1बी मंजूरी में लगभग 2.83 लाख भारतीयों को मिली थी। कई भारतीय सालों से अमेरिका में नौकरी, घर और परिवार बसा चुके हैं।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को सख्त करने के नए नियम के बाद H-1B वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों में भारी चिंता फैल गई थी। नियम के मुताबिक, अस्थायी वीजा पर रहने वाले विदेशी नागरिकों को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) के लिए अपने देश लौटकर आवेदन करना पड़ सकता था। इससे अमेरिका में नौकरी, परिवार और जीवन को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी, खासकर टेक क्षेत्र में कार्यरत भारतीयों के बीच।
अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सर्विसेज ने बाद में साफ किया कि जिन आवेदकों का काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाता है या राष्ट्रीय हित में है, वे अमेरिका में रहकर ही अपनी प्रक्रिया जारी रख सकते हैं। यूएससीआईएस के प्रवक्ता जेक कहलर ने कहा कि आर्थिक लाभ या राष्ट्रीय महत्व के मामलों में अपवाद दिए जा सकते हैं। हालांकि, अन्य मामलों में व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर विदेश से आवेदन करने को कहा जा सकता है। इस स्पष्टीकरण से भारतीय समुदाय में कुछ राहत महसूस की जा रही है।
भारतीयों पर क्या होगा प्रभाव
भारतीय एच-1बी वीजा धारकों की संख्या सबसे ज्यादा है। वित्तीय वर्ष 2025 में कुल 4 लाख से अधिक एच-1बी मंजूरी में लगभग 2.83 लाख भारतीयों को मिली थी। कई भारतीय सालों से अमेरिका में नौकरी, घर और परिवार बसा चुके हैं। ग्रीन कार्ड बैकलॉग की वजह से वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। नए नियम से पहले वे एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस प्रक्रिया के तहत अमेरिका में रहते हुए ही ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर पाते थे। अब आर्थिक योगदान साबित करने वाले को राहत मिल सकती है, लेकिन स्पष्ट दिशानिर्देश न होने से अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
टेक उद्योग के लीडर श्रीधर वेम्बू ने भारतीयों से भारत लौटने की अपील की, जिस पर सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं। कई लोगों ने कहा कि सालों की मेहनत और परिवार को छोड़ना आसान नहीं है। इस बीच, मेटा, अमेजन जैसी कंपनियों में छंटनी से एच-1बी कर्मचारियों पर दबाव बढ़ा है। नौकरी छूटने पर 60 दिनों में नई नौकरी ढूंढनी होती है, नहीं तो देश छोड़ना पड़ता है। अब ताजा बयान से कुछ उम्मीद जगी है, लेकिन पूरी स्थिति अभी साफ नहीं हुई है।




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