Desh Chhorkar bhage nahin ja rahe, three hour long debate in Gauhati High Court over Pawan Khera anticipatory bail plea देश छोड़कर भागे नहीं जा रहे... पवन खेड़ा की अर्जी पर सिंघवी और AG में तीन घंटे तीखी भिड़ंत, फैसला क्या?, India News in Hindi - Hindustan
More

देश छोड़कर भागे नहीं जा रहे... पवन खेड़ा की अर्जी पर सिंघवी और AG में तीन घंटे तीखी भिड़ंत, फैसला क्या?

सिंघवी ने कहा कि याचिकाकर्ता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं है और उनकी गिरफ्तारी की कोई जरूरत ही नहीं है। इसके खिलाफ असम के महाधिवक्ता (AG) देवजीत लोन सैकिया ने खेड़ा को कोई भी राहत देने का सख्त विरोध किया।

Tue, 21 April 2026 10:50 PMPramod Praveen पीटीआई, गुवाहाटी
share
देश छोड़कर भागे नहीं जा रहे... पवन खेड़ा की अर्जी पर सिंघवी और AG में तीन घंटे तीखी भिड़ंत, फैसला क्या?

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार (21 अप्रैल) को गुवाहाटी हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील दी कि कांग्रेस नेता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं है। ऐसे में उन्हें गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है। यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज की गई एक FIR के संबंध में है। दरअसल, पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि उनके पास कई पासपोर्ट हैं। इसी के खिलाफ आपराधिक FIR दर्ज की गई है। उसी मामले में खेड़ा ने अग्रिम जमानत की अर्जी दी है।

जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की तीन घंटे से ज़्यादा समय तक गरमागरम दलीलें सुनने के बाद अपना अंतिम आदेश सुरक्षित रख लिया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कांग्रेस नेता के आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री सरमा की टिप्पणी, खासकर राज्य में विधानसभा चुनावों के संदर्भ में राजनीतिक बदले की भावना की ओर इशारा करती है।

याचिकाकर्ता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं

सिंघवी ने कहा कि याचिकाकर्ता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं है और उनकी गिरफ्तारी की कोई जरूरत ही नहीं है। इसके खिलाफ असम के महाधिवक्ता (AG) देवजीत लोन सैकिया ने खेड़ा को कोई भी राहत देने का सख्त विरोध करते हुए कहा कि यह कोई साधारण मानहानि का मामला नहीं है, क्योंकि यह मामला दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़ा है। सैकिया ने बताया कि मुख्य अपराध धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े हैं। उन्होंने दलील दी कि खेड़ा अंतरिम सुरक्षा के हकदार नहीं हैं क्योंकि उनके ''देश से भागने का खतरा'' है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:'क्या मैं आतंकवादी हूं', कोर्ट में पवन खेड़ा की ओर से ऐसा क्यों कहा गया

अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल

खेड़ा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि शिकायतकर्ता के पति, जो मौजूदा मुख्यमंत्री भी हैं, ने कई मौकों पर (प्रेस से बातचीत में) और अन्य तरीकों से बार-बार यह दावा किया है कि वह याचिकाकर्ता पर हमला करेंगे (जब वह पुलिस हिरासत में होगा) और वह अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिन हिरासत में ही बिताएगा। उन्होंने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता के पति ने उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद की "बहुत बुरी छवि" बनी।

जान-बूझकर दुर्भावना से ग्रस्त आरोप

वरिष्ठ वकील के.एन. चौधरी, जिन्होंने सोमवार को खेड़ा की तरफ से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, ने कांग्रेस नेता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को "अपमानजनक" बताया। उन्होंने कहा, "आरोपों का तरीका, लहजा और प्रस्तुति साफ तौर पर दिखाते हैं कि वे जान-बूझकर दुर्भावना से लगाए गए थे।" उन्होंने यह भी तर्क दिया कि, ज़्यादा से ज़्यादा, यह मानहानि का एक आपराधिक मामला है, जिसे केवल एक निजी शिकायत के ज़रिए ही आगे बढ़ाया जा सकता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:पवन खेड़ा की जमानत अर्जी पर HC में AG-सिंघवी में घंटे भर संग्राम, नहीं मिली राहत

खेड़ा को राहत देने का विरोध

इस पर असम के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने खेड़ा को किसी भी तरह की राहत देने का विरोध करते हुए कहा कि यह मानहानि का कोई साधारण मामला नहीं है, क्योंकि इस मामले में दस्तावेज़ों और संपत्ति के कागज़ातों में जालसाज़ी शामिल है। सैकिया ने बताया कि इसमें मुख्य अपराध धोखाधड़ी और जालसाज़ी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि खेड़ा अंतरिम सुरक्षा के हकदार नहीं हैं क्योंकि उनके "भागने का खतरा" है।

रिनिकी भुइयां शर्मा ने केस दर्ज कराया था

महाधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता ने राजनीतिक लाभ उठाने और मुख्यमंत्री तथा उनकी उद्यमी पत्नी को बदनाम करने के लिए नकली और मनगढ़ंत दस्तावेज़, मुहरें और स्टैम्प पेश किए थे। कांग्रेस प्रवक्ता ने सोमवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत के लिए अर्ज़ी दी। यह मामला मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा ने उनके खिलाफ दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रवक्ता ने दावा किया था कि उनके पास कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां हैं। खेड़ा ने अपनी याचिका में कहा कि उन्हें अग्रिम ज़मानत दी जानी चाहिए, क्योंकि उन पर लगाए गए आरोप "किसी खास मकसद से प्रेरित" लगते हैं, और ऐसा लगता है कि ये आरोप "किसी छिपे हुए मकसद या राजनीतिक बदले की भावना से लगाए गए हैं।"

उन्होंने दावा किया कि उन्हें गिरफ्तार करने का कोई आधार नहीं है और प्रतिवादी जल्दबाजी में काम कर रहा है, जबकि पुलिस अधिकारियों का "मनमाना और ज़बरदस्ती वाला रवैया" उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। खेड़ा ने यह भी बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कामरूप (M) ने भी यह राय दी है कि रिकॉर्ड के आधार पर गिरफ्तारी के गैर-ज़मानती वारंट (NBWA) जारी करने का कोई आधार नहीं बनता है, और NBWA जारी करने के आधार केवल अनुमानों और अटकलों पर आधारित थे। बता दें कि AICC के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष खेड़ा ने 5 अप्रैल को नई दिल्ली और गुवाहाटी में हुई दो प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास UAE, मिस्र और एंटीगुआ और बारबुडा के तीन पासपोर्ट हैं - साथ ही दुबई में दो संपत्तियां और शेल कंपनियों में संपत्तियां हैं।

इसके बाद, उन्होंने गुवाहाटी क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में खेड़ा और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामले दर्ज कराए। इन धाराओं में 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान), 35, 36, 318 (धोखाधड़ी), 338 (कीमती वसीयत, प्रतिभूति आदि की जालसाज़ी), 337 (अदालत के रिकॉर्ड या सार्वजनिक रजिस्टर आदि की जालसाज़ी), 340 (जाली दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाना और उसे असली के तौर पर इस्तेमाल करना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), और 356 (मानहानि) शामिल हैं। इसके बाद, असम पुलिस 7 अप्रैल को दिल्ली में खेड़ा के आवास पर गई, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं थे। बाद में उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट में ट्रांज़िट अग्रिम ज़मानत के लिए अर्ज़ी दी, जो उन्हें एक सप्ताह के लिए मंजूर कर ली गई। इसके बाद असम पुलिस ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, और 15 अप्रैल को देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए अग्रिम ट्रांजिट ज़मानत देने पर रोक लगा दी।