इसे 'आतंकी कृत्य' करें घोषित ; TCS के धर्मांतरण केस में BJP नेता ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
याचिका में केंद्र और राज्यों को धर्मांतरण के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने और यह घोषित करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि धोखे से किए गए धर्मांतरण के लिए सजा एक साथ नहीं बल्कि क्रमिक होगी।

महाराष्ट्र के नासिक स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी के अंदर चल रहे धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के खेल का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने गुरुवार (16 अप्रैल) को शीर्ष न्यायालय में एक याचिका दायर कर वहां चल रहे जबरदस्ती धर्म परिवर्तन की हरकतों को "आतंकवादी कृत्य" घोषित करने की मांग की है। याचिका में धोखाधड़ीपूर्ण धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिये निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। यह याचिका नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के दफ़्तर में धर्म परिवर्तन और यौन उत्पीड़न के आरोपों के सामने आने के बाद दायर की गई है।
अपनी याचिका में अश्विनी उपाध्याय ने दलील दी है कि "धोखे से धर्म परिवर्तन" न केवल "संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा है, बल्कि भाईचारे, गरिमा, एकता और राष्ट्रीय एकता के लिए भी एक संकट है।" याचिका में कहा गया है, “नासिक में संगठित धर्म परिवर्तन ने पूरे देश के नागरिकों की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। इसलिए, याचिकाकर्ता धोखे से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए निर्देश और घोषणाएं जारी करने की मांग करते हुए यह आवेदन दायर कर रहा है।”
यह एक सुनियोजित साज़िश है
अधिवक्ता अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर याचिका में धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को कड़े कदम उठाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसमें आगे कहा गया, “ज़बरदस्ती या धोखे से धर्म परिवर्तन कोई अलग-थलग धार्मिक कृत्य नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित साज़िश है, जिसे अक्सर विदेशी संस्थाओं द्वारा वित्तपोषित किया जाता है, ताकि जनसांख्यिकीय संतुलन को बदला जा सके और इस तरह भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा पहुँचाया जा सके। ऐसे में, यह UAPA की धारा 15 के तहत परिभाषित 'आतंकवादी कृत्य' के दायरे में आता है।”
"आतंकवादी कृत्य" के दायरे में आता है
याचिका में यह तर्क दिया गया कि जबरन धर्मांतरण का अपराध, जब एक व्यवस्थित, संगठित और जबरदस्ती अभियान के हिस्से के रूप में किया जाता है, तो भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 113 के तहत परिभाषित "आतंकवादी कृत्य" के दायरे में आता है। इसमें केंद्र और राज्यों को धर्मांतरण के मामलों से निपटने के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने और यह घोषित करने के निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि धोखे से किए गए धर्मांतरण के लिए सजा एक साथ नहीं बल्कि क्रमिक होगी। याचिका में कहा गया है कि धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार में धोखाधड़ी, बल प्रयोग, दबाव या छल के माध्यम से दूसरों को धर्मांतरित करने का अधिकार शामिल नहीं है।




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