'दूसरों की सेवा के लिए हैं भारतीय'; सैम पित्रोदा के बयान पर बवाल, BJP भड़की
कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने कहा कि भारत ने शिक्षण संस्थाओं की दम पर एक बड़ी युवा प्रतिभा को बनाया है। लेकिन इसका उपयोग करने में असमर्थ रहा। यह शर्म की बात है कि 1.5 अरब आबादी वाले देश के पास अपना ऑपरेटिंग सिस्टम भी नहीं है।

भारतीय प्रवासी कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने एक बार फिर से एक बयान के जरिए पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने दावा किया कि भारत ने दूसरों की सेवा के लिए युवाओं की बड़ी फौज को खड़ा किया है। लेकिन यह भारत के लिए नहीं बल्कि विदेशियों के लिए काम करती है। पित्रोदा ने वर्तमान टेक्नोलॉजी निर्माण की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक 1.5 अरब आबादी वाले देश के लिए यह शर्म की बात है कि उनके पास अपना ऑपरेटिंग सिस्टम तक नहीं है। पित्रोदा की इस टिप्पणी के बाद भाजपा ने उन पर हमला बोलते हुए भारत की निंदा करने का आरोप लगाया।
एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कांग्रेस नेता ने विदेशी कंपनियों में भारतीयों की संख्या जिक्र करते हुए अपनी बात को रखा। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी शिक्षा संस्थाओं के जरिए युवा प्रतिभा का एक बड़ा आधार तैयार किया है, लेकिन भारत में ही नई खोजों के लिए इसका लाभ उठाने में नई दिल्ली पूरी तरह से असमर्थ रही है। उन्होंने कहा, "हमने बहुत सारी युवा प्रतिभा का निर्माण किया है, लेकिन यह अपरिपक्व है। इस प्रतिभा ने भारत का नहीं बल्कि दुनिया की तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रोग्रामिंग, कानून, उद्योग, लॉजिस्टिक्स, इनोवेशन, बैंकिंग में मदद की है। इस प्रतिभा के दम पर भारत ने वैश्विक स्तर के प्रोडक्ट्स नहीं बनाए, बल्कि इस प्रतिभा का इस्तेमाल दूसरे की सेवा के लिए किया।"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सैम पित्रोदा ने कहा, "न हो भारत ने अपना खुद का सोशल मीडिया प्लेटफार्म तैयार किया और न ही माइक्रोसॉफ्ट जैसी कोई बड़ी कंपनी तैयार कर पाए। हमने अपना खुद का ऑपरेटिंग सिस्टम तक नहीं बनाया। यह शर्म की बात है कि 1.5 अरब आबादी वाले देश के पास खुद का ऑपरेटिंग सिस्टम भी नहीं है। हम मोबाइल फोन के लिए भी ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं बना पाए। हमने सचमुच अपनी युवा प्रतिभा का उपयोग दूसरों की सेवा के लिए किया है।"
भाजपा हुई हमलावर
वरिष्ठ कांग्रेस नेता की तरफ से आई इस टिप्पणी पर सत्ताधारी भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा की तरफ से प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि 'लश्कर ए कांग्रेस' के मुख्य सलाहकार ने एक बार फिर से झूठ बोलकर भारत का मजाक उड़ाने की कोशिश की है।
उन्होंने लिखा, "एआई समिट में कांग्रेस के टॉपलेस ऐक्ट के बाद लश्कर ए कांग्रेस के मुख्य सलाहकार सैम पित्रोदा मैदान में हैं। एक एक बार फिर भारत को बदनाम करने के एजेंडे पर। अंकल सैम झूठ बोलकर भारत का मजाक उड़ाते हैं। कहते हैं कि भारत पर शर्म आती है कि उसने मोबाइल के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम तक विकसित नहीं किया है।"
उन्होंने पित्रोदा की टिप्पणियों का खंडन करते हुए भारत में विकसित ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे बॉस लिनक्स, माया ओएस, प्राइमओएस, भारओएस, इंडस ओएस और एनएक्सटीक्वांटम ओएस का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस का "एकमात्र मिशन झूठ बोलकर भारत को बदनाम करना है।" भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई, देशी टीकों और टेक्नोलॉजी का जिक्र करते हुए पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस को भारत से नफरत है।
विवादों से पित्रोदा का पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है कि सैम पित्रोदा किसी बयान को लेकर विवादों में घिर गए हों। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ है कि उनके बयान के चक्कर में कांग्रेस पार्टी को असहजता महसूस करनी पड़ी हो। पिछले साल, वे तब आलोचनाओं के घेरे में आए जब उन्होंने केंद्र सरकार से पड़ोसी देशों के साथ संवाद को प्राथमिकता देने का आग्रह किया और कहा कि भारत की विदेश नीति की शुरुआत पाकिस्तान सहित इस क्षेत्र में संबंधों को मजबूत करने से होनी चाहिए। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "मेरे विचार से हमारी विदेश नीति को सबसे पहले अपने पड़ोस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। क्या हम वास्तव में अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों में ठोस सुधार ला सकते हैं?… मैं पाकिस्तान गया हूँ, मैं आपको बता दूँ, मुझे वहाँ घर जैसा महसूस हुआ। मैं बांग्लादेश गया हूँ, मैं नेपाल गया हूँ, और मुझे वहाँ भी घर जैसा महसूस हुआ। मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं किसी विदेशी देश में हूँ।”
इसके पहले पित्रोदा ने भारत की विविधिता पर की गई टिप्पणियों को लेकर भी आलोचना का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा था, “हम भारत जैसे विविधतापूर्ण देश को एकजुट रख सकते हैं यहां पूर्व में लोग चीनी जैसे दिखते हैं, पश्चिम में लोग अरब जैसे दिखते हैं, उत्तर में लोग शायद गोरे दिखते हैं,और दक्षिण में लोग अफ्रीकी जैसे दिखते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम सब भाई-बहन हैं।” इसके अलावा पित्रोदा सिख दंगों को लेकर की गई अपनी 'हुआ तो हुआ' वाली टिप्पणी के लिए भी आलोचना का सामना करते रहे हैं।




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