जब जज फाइलें पलटते रहते हैं तब तुषार भाई… सॉलिसिटर जनरल पर CJI सूर्यकांत ने कस दिया तंज
CJI यहां सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के बुक लॉन्च इवेंट में पहुंचे थे। यहां उन्होंने तुषार मेहता की जमकर सराहना की। वहीं बातों बातों में उन्होंने मजाकिया सवाल पूछते हुए खुद ही उसका जवाब भी दे दिया।

सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने हाल ही में अपनी दो किताबें लॉन्च की हैं। रविवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एक कार्यक्रम में इन किताबों का विमोचन हुआ। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत का मजाकिया अंदाज देखने को मिला। यहां उन्होंने सॉलिसिटर जनरल पर तंज कसते हुए बताया कि आखिर तुषार मेहता इतनी व्यस्तता और काम के दबाव के बीच किताब लिखने का समय कैसे निकाल लेते हैं।
मेहता की 2 किताबों, 'द बेंच, द बार एंड द बिजार' और 'द लॉफुल एंड द ऑॉफुल' के लॉन्च के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने बताया कि मेहता अपनी सुबह सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम नंबर 1 में बिताते हैं, दोपहर का समय दूसरी अदालतों और सरकारी कामों में लगाते हैं, वहीं शाम को केस ब्रीफ के हजारों पन्ने पढ़ते हैं, ऐसे में उन्हें किताब लिखने का समय कैसे मिला।
जब जज मोटी-मोटी फाइलें पलटने में व्यस्त होते हैं…
उन्होंने खुद ही इसका जवाब देते हुए कहा, "जब मैं ये किताबें देख रहा था, तो मेरे मन में एक ही सवाल आया कि तुषार भाई ने इन्हें लिखने का समय कब निकाला? मेरे पास इसके लिए दो थ्योरी हैं। पहली, या तो उन्होंने भगवान से दिन में 25वां घंटा मांग लिया है और उस पर 'स्टे' ले लिया है। या फिर दूसरी थ्योरी यह है कि कोर्ट नंबर-1 में जब जज मोटी-मोटी फाइलें पलटने में व्यस्त होते हैं, तब तुषार भाई चुपके से वहां बैठकर ये मजेदार कहानियां लिखते हैं। मुझे दूसरी थ्योरी पर ज्यादा भरोसा है।"
जस्टिस सूर्यकांत ने सुनाए मजेदार किस्से
CJI ने इस दौरान कहा कि कोर्ट रूम में ह्यूमर यानी हास्य केवल मनोरंजन के लिए नहीं होता, बल्कि इसका शैक्षिक महत्व भी होता है। उन्होंने कहा कि तुषार मेहता ने इन किताबों के जरिए दिखाया है कि जजों के चोगों के पीछे भी धड़कता हुआ दिल होता है। समारोह के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कई पुराने किस्से भी सुनाए।
उन्होंने बताया कि किस तरह एक बार एक युवा वकील अपनी दलीलें नहीं समझा पाया, तो उसने जज से कहा कि शायद मेरे 'कम्युनिकेशन' में कोई कमी रह गई। इस पर जज ने जवाब दिया, "कमी केवल कम्युनिकेशन में नहीं है, ट्रांसमिशन में भी दिक्कत है। वहीं ब्रिटिश जज लॉर्ड लीच के सामने जब एक वकील बहस कर रहा था, तभी बाहर एक गधा रेंकने लगा। जज ने मजाक में कहा, "एक बार में एक ही बोलिए।" थोड़ी देर बाद जब जज फैसला सुनाने लगे और गधा फिर रेंका, तो वकील ने तुरंत पलटवार किया, “माय लॉर्ड, क्या आप अपनी बात दोहरा सकते हैं? शब्द साफ सुनाई नहीं दिए।”
SG की किताबों में कोर्टरूम की कहानियां
बता दें कि तुषार मेहता देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले सॉलिसिटर जनरल हैं। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने अपनी हालिया किताबों में असली किस्सों का जिक्र किया है। अपनी किताबों के बताते हुए उन्होंने कहा है कि ये कोई कानूनी शोध या अकादमिक आलोचना नहीं हैं बल्कि कि ये कोर्टरूम में होने वाली सच्ची और मजेदार घटनाओं का एक संग्रह है।




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