सिकुड़ गया 56 इंच का सीना, पाकिस्तान ने करा दिया युद्धविराम; PM मोदी पर बरसी कांग्रेस
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पीएम मोदी की विदेश नीति पर बड़ा हमला बोला है। जानें उन्होंने 'स्वयंभू विश्वगुरु', '56 इंच के सीने' और 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर केंद्र सरकार पर क्या तीखे सवाल उठाए।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र की विदेश नीति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया युद्धविराम में पाकिस्तान द्वारा निभाई गई मध्यस्थता की भूमिका को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक गंभीर झटका करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अपने बमबारी और हमले के अभियान को रोकते हुए दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की है और ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इसके जवाब में ईरान ने भी ट्रंप की शांति पहल को स्वीकार कर लिया है। ईरान दो सप्ताह तक सैन्य अभियानों को रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करने पर सहमत हो गया है। इस पूरे मामले में दोनों देशों के बीच वार्ता की मेजबानी कर पाकिस्तान ने एक अहम भूमिका निभाई है।
जयराम रमेश ने साधा निशाना
कांग्रेस नेता ने एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी विदेश नीति की तीखी आलोचना की।
"स्वयंभू विश्वगुरु" बेनकाब
जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि अब 'स्वयंभू विश्वगुरु' पूरी तरह से बेनकाब हो गए हैं और उनका 56 इंच का सीना सिकुड़ गया है। उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा जिन्होंने पहले पाकिस्तान को महज एक 'दलाल' बताकर खारिज कर दिया था।
इजरायल और पश्चिम एशिया संकट पर 'चुप्पी'
रमेश ने 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का हालिया इजरायल दौरा ऐसे समय में हुआ था जिसने भारत के वैश्विक कद को घटा दिया। रमेश के अनुसार, पीएम मोदी ने गाजा में इजरायल की आक्रामकता और वेस्ट बैंक में उसकी विस्तारवादी नीतियों पर कुछ नहीं कहा। साथ ही, उन्होंने ट्रंप द्वारा इस्तेमाल की जा रही अस्वीकार्य और अपमानजनक भाषा पर भी पीएम मोदी की चुप्पी को उनकी 'कायरता' बताया।
पाकिस्तान को अलग-थलग करने की नीति विफल
पाकिस्तान को विदेशी दानदाताओं की खैरात पर निर्भर एक दिवालिया अर्थव्यवस्था बताते हुए रमेश ने कहा कि इस युद्धविराम में पाकिस्तान की भूमिका पीएम मोदी की 'व्यक्तिगत कूटनीति' की शैली और प्रभाव दोनों के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन करने वाले पाकिस्तान को अलग-थलग करने और उसे एक 'विफल राष्ट्र' साबित करने की नीति साफ तौर पर नाकाम रही है। उन्होंने इसकी तुलना मुंबई आतंकी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह की सफल कूटनीति से की।
'ऑपरेशन सिंदूर' पर सवाल
उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार या उनकी टीम ने आज तक यह स्पष्ट क्यों नहीं किया कि 10 मई 2025 को 'ऑपरेशन सिंदूर' को अचानक क्यों रोक दिया गया था? उन्होंने याद दिलाया कि इसकी पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री ने की थी और अमेरिकी राष्ट्रपति इसके लिए सौ बार से ज्यादा श्रेय ले चुके हैं।
जयराम रमेश का पूरा बयान-
"पूरी दुनिया पश्चिम एशिया में एक तरफ US और इजराइल और दूसरी तरफ ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष में लागू हुए दो सप्ताह के संघर्षविराम का सावधानीपूर्वक स्वागत करेगी। यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के शासन के शीर्ष नेतृत्व की टारगेटेड किलिंग के साथ शुरू हुआ था। यह घटनाएं प्रधानमंत्री मोदी की बहुचर्चित इजरायल यात्रा पूरी होने के ठीक दो दिन बाद शुरू हुई थीं- इस यात्रा ने भारत की वैश्विक साख और प्रतिष्ठा को कम किया। पीएम मोदी ने गाजा में इजरायल द्वारा किए जा रहे नरसंहार और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में उसकी आक्रामक विस्तारवादी नीतियों पर कुछ नहीं कहा। युद्धविराम कराने में पाकिस्तान की भूमिका, पीएम मोदी की अत्यधिक व्यक्तिनिष्ठ कूटनीति के सार और शैली-दोनों-के लिए एक गंभीर झटका है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जारी समर्थन के कारण पाकिस्तान को अलग-थलग करने और दुनिया को यह विश्वास दिलाने की नीति कि वह एक विफल राष्ट्र है, स्पष्ट रूप से सफल नहीं हुई है- जैसा कि डॉ. मनमोहन सिंह ने मुंबई आतंकी हमलों के बाद कर दिखाया था। यह तथ्य कि एक दिवालिया अर्थव्यवस्था, जो पूरी तरह बाहरी डोनर्स की मदद पर निर्भर है, और कई मायनों में एक टूटे हुए देश ने ऐसी भूमिका निभा ली, पीएम मोदी की कूटनीतिक रणनीति और नैरेटिव प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने या उनकी टीम ने यह भी कभी नहीं बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को 10 मई 2025 को अचानक और तत्काल क्यों रोक दिया गया-जिसकी पहली घोषणा अमेरिका के विदेश मंत्री ने की थी और जिसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति तब से लगभग सौ बार श्रेय ले चुके हैं। हर जगह एक स्पष्ट राहत की भावना है। विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को दलाल कहकर खारिज किया था। लेकिन अब स्वयंभू विश्वगुरु पूरी तरह एक्सपोज हो चुके हैं-उनका स्वयं घोषित 56 इंच का सीना सिमटकर रह गया है। उनकी कायरता न केवल इज़रायल की आक्रामकता पर, बल्कि व्हाइट हाउस में बैठे उनके करीबी मित्र द्वारा इस्तेमाल की जा रही पूरी तरह अस्वीकार्य और शर्मनाक भाषा पर भी उनकी चुप्पी से पता चलती है।"
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बयान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस अस्थायी रोक का स्वागत किया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए घोषणा की कि ईरान और अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ लेबनान सहित सभी जगहों पर तत्काल प्रभाव से युद्धविराम के लिए सहमत हो गए हैं। शरीफ ने दोनों देशों के नेतृत्व का आभार व्यक्त किया और एक स्थायी समझौते पर बातचीत के लिए उनके प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद आमंत्रित किया है।
अमेरिकी विशेषज्ञ की प्रतिक्रिया
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज (FDD) के कार्यकारी निदेशक और पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी काउंटर-टेररिज्म विश्लेषक, जोनाथन शेंजर ने इस मामले में अपनी अलग राय रखी है। उन्होंने वाइट हाउस के साथ बातचीत में पाकिस्तान के कूदने को अजीब करार दिया। शेंजर ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान चीन के भारी कर्ज में डूबा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान अमेरिका का साथ देकर अपने गठबंधनों का विस्तार कर रहा है, या फिर वह महज चीन के इशारे पर काम कर रहा है।




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