Centre tendered an unconditional apology in Supreme Court over NCERT book controversy CJI said We will not let it go NCERT बुक विवाद में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त मांगी माफी, CJI बोले- छोड़ेंगे नहीं, India News in Hindi - Hindustan
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NCERT बुक विवाद में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त मांगी माफी, CJI बोले- छोड़ेंगे नहीं

चौतरफा आलोचना और कानूनी दबाव के बाद NCERT ने एक आधिकारिक बयान जारी कर माफी मांगी है। परिषद ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का वे सर्वोच्च सम्मान करते हैं और उसे संविधान का रक्षक मानते हैं।

Thu, 26 Feb 2026 12:34 PMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली।
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NCERT बुक विवाद में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त मांगी माफी, CJI बोले- छोड़ेंगे नहीं

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगी है। आपको बता दें कि यह विवाद 24 फरवरी, 2026 को जारी की गई नई सिलेबस के बाद शुरू हुआ, जिसने न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने वाले अंशों के कारण कोर्ट को नाराज कर दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाया। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सीजेआई ने कहा, "ऐसा लगता है कि न्यायपालिका को बदनाम करने के लिए यह एक गहरी और सुनियोजित साजिश रची गई है।" उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलेगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए शिक्षा सचिव और NCERT के निदेशक से जवाब तलब किया है कि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही केंद्र सरकार से ऑनउलब्ध पीडीएफ फाइल को जल्द से जल्द हटाने का आदेश दिया है।

क्या था विवादित अध्याय?

विवाद की जड़ कक्षा 8वीं की पुस्तक "एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम II" का अध्याय नंबर 4 है। जिसका शीर्षक है 'हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका'। इस अध्याय में न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार पर कुछ ऐसी बातें शामिल की गई थी, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने आपत्तिजनक और अनुचित पाया।

चौतरफा आलोचना और कानूनी दबाव के बाद NCERT ने एक आधिकारिक बयान जारी कर माफी मांगी है। परिषद ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का वे सर्वोच्च सम्मान करते हैं और उसे संविधान का रक्षक मानते हैं।

38 बिकी हुई कॉपियों को ढूंढ रहा है मंत्रालय

मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस विवादित पुस्तक की कुल 2.25 लाख प्रतियां छपी थीं। गनीमत यह रही कि भारी संख्या में वितरण से पहले ही विवाद सामने आ गया। कुल 2,24,962 प्रतियां अभी भी गोदामों में सुरक्षित हैं जिन्हें वापस मंगा लिया गया है। सिर्फ 38 प्रतियां बाजार में बिक चुकी हैं। शिक्षा मंत्रालय और NCERT अब उन्हें ट्रैक करके वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं।

स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया है कि अगली सूचना तक इन पुस्तकों का वितरण पूरी तरह से बंद रहेगा। सरकार अब इस बात की जांच कर रही है कि संवेदनशील विषयों पर पाठ्यसामग्री तैयार करने वाली विशेषज्ञ समिति से इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।

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