Bottle and can supply stalled due to Iran war, now danger of liquor shortage in India ईरान युद्ध के कारण बोतल और कैन सप्लाई ठप, भारत में अब शराब की किल्लत का खतरा!, India News in Hindi - Hindustan
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ईरान युद्ध के कारण बोतल और कैन सप्लाई ठप, भारत में अब शराब की किल्लत का खतरा!

ईरान में चल रहे युद्ध के चलते गैस की कमी और शिपिंग व्यवधान से कांच की बोतलों तथा एल्यूमीनियम कैन की कीमतों में उछाल आया है, जिससे भारत की प्रमुख बीयर उत्पादक कंपनियां उत्पादन लागत बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने की चेतावनी दे रही हैं।

Tue, 24 March 2026 05:09 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ईरान युद्ध के कारण बोतल और कैन सप्लाई ठप, भारत में अब शराब की किल्लत का खतरा!

ईरान में चल रहे युद्ध के चलते गैस की कमी और शिपिंग व्यवधान से कांच की बोतलों तथा एल्यूमीनियम कैन की कीमतों में उछाल आया है, जिससे भारत की प्रमुख बीयर उत्पादक कंपनियां उत्पादन लागत बढ़ने और आपूर्ति प्रभावित होने की चेतावनी दे रही हैं। वैश्विक शराब निर्माता कंपनियां कीमतों में वृद्धि और संभावित कमी की आशंका जता रही हैं। ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, जो हेनेकेन, एनहेउसर-बुश इनबेव और कार्ल्सबर्ग जैसी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, ने बताया कि कांच की बोतलों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कागज के डिब्बों की दरें दोगुनी हो गई हैं। लेबल और टेप जैसी अन्य पैकेजिंग सामग्री की कीमतें भी बढ़ गई हैं।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए एसोसिएशन के महानिदेशक विनोद गिरी ने कहा कि हम कीमतों में 12-15 प्रतिशत की वृद्धि की मांग कर रहे हैं। हमने अपनी सदस्य कंपनियों को विभिन्न राज्यों से अलग-अलग संपर्क करने की सलाह दी है। उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण कुछ परिचालन अव्यवहार्य हो रहे हैं। वहीं हेनेकेन की भारतीय इकाई यूनाइटेड ब्रुअरीज, एबी इनबेव और कार्ल्सबर्ग ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

गैस का चौथा बड़ा आयातक देश है भारत

बता दें कि भारत प्राकृतिक गैस का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा आयातक है और अपनी आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत कतर से प्राप्त करता है, जो मध्य पूर्व पर काफी निर्भर है। ईरान के हमलों से कतर की निर्यात क्षमता आंशिक रूप से प्रभावित हुई है, जिससे गैस उपलब्धता कम हो गई है। कांच की बोतल बनाने वाली कंपनियों को गैस की कमी के कारण अपने भट्टियों और उत्पादन लाइनों को आंशिक या पूर्ण रूप से बंद करना पड़ा है।

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एल्यूमीनियम कैन आपूर्तिकर्ताओं ने भी कमी की आशंका जताई है, ठीक उसी समय जब देश गर्मी के चरम मौसम में प्रवेश कर रहा है और बीयर की बिक्री आमतौर पर बढ़ जाती है। ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार, 2024 में भारतीय बीयर बाजार की कीमत 7.8 अरब डॉलर थी और 2030 तक इसके दोगुना होने की उम्मीद है। हेनेकेन की बाजार में लगभग आधी हिस्सेदारी है, जबकि एबी इनबेव और कार्ल्सबर्ग की 19 प्रतिशत। इसके अलावा बीरा और सिम्बा जैसी छोटी कंपनियां भी बाजार में सक्रिय हैं।

कांच और प्लास्टिक उद्योग पर भी असर

उत्तर प्रदेश के कांच निर्माण केंद्र फिरोजाबाद में स्थित फाइन आर्ट ग्लास वर्क्स के सीईओ नितिन अग्रवाल ने बताया कि गैस की कमी के कारण उनके कारखाने में उत्पादन में 40 प्रतिशत की कटौती करनी पड़ी है। उनके ग्राहकों में शराब कंपनियों के अलावा जूस और केचप बोतल बनाने वाले भी शामिल हैं। अग्रवाल ने कहा कि हमने उत्पादन घटाया है और कीमतों में 17-18 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।

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भारतीय मादक पेय कंपनियों के परिसंघ ने माल ढुलाई, रसद और इनपुट लागत बढ़ने के मद्देनजर कई राज्यों को पत्र लिखकर मूल्य समायोजन की मांग की है। बताया गया कि जिन राज्यों में कीमत बढ़ाने की अनुमति नहीं मिलेगी, वहां आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। कुछ कांच बोतल विक्रेताओं ने पहले ही ग्राहकों को कमी की चेतावनी देते हुए कीमतें बढ़ा दी हैं।

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बताया जा रहा है कि इस संकट ने प्लास्टिक की बोतलों और ढक्कनों की बढ़ती कीमतों के कारण भारत के 5 अरब डॉलर के बोतलबंद पानी के बाजार को भी प्रभावित कर दिया है, जहां कुछ उत्पादकों ने कीमतों में 11 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। दक्षिण कोरिया की प्रमुख शीतल पेय कंपनी लोटे चिलसंग बेवरेज के एक कार्यकारी ने कहा कि उनके पास तीन महीने का स्टॉक है, लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है।