BJP promotes Himanta Samrat Suvendu as CM in around 6 years mirror similar career growth clout for tourncoat outsiders लगभग 6 साल इंतजार, फिर सरकार; दूसरे दलों से BJP में आए 4 सीएम की एक जैसी तरक्की, India News in Hindi - Hindustan
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लगभग 6 साल इंतजार, फिर सरकार; दूसरे दलों से BJP में आए 4 सीएम की एक जैसी तरक्की

Other Party Leaders Made Chief Minister in BJP: भाजपा में दूसरे दलों से आए कद्दावर नेताओं को टॉप पर पहुंचने में लगभग 6 साल लग रहा है। हिमंत बिस्वा सरमा, मानिक साहा, सम्राट चौधरी और शुभेंदु अधिकारी ऐसे ही सीएम में हैं।

Tue, 12 May 2026 08:14 PMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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लगभग 6 साल इंतजार, फिर सरकार; दूसरे दलों से BJP में आए 4 सीएम की एक जैसी तरक्की

Other Party Leaders Made Chief Minister in BJP: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के युग में दूसरी पार्टियों से आए प्रभावशाली नेताओं को लगभग छह साल में अपने-अपने राज्य में सत्ता का शीर्ष हासिल हो गया है। बात चाहे असम में आज दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंत बिस्वा सरमा की हो या त्रिपुरा में चार साल से सरकार चला रहे मानिक साहा की, तीन दिन पहले पश्चिम बंगाल में सीएम बने शुभेंदु अधिकारी की हो या फिर बिहार में दो साल सरकार में नंबर 2 रहकर पिछले महीने प्रमोट हुए सम्राट चौधरी की। कांग्रेस, जदयू और टीएमसी से आकर भाजपा में छाए इन चार नेताओं का राजनीतिक करियर एक जैसा परवान चढ़ा है और चारों आज बीजेपी के ताकतवर नेता हैं। पार्टी ऐसे नेताओं की सीएम तक तरक्की से यह संदेश भी दे रही है कि नेता में दम हो तो वह अंदर का हो या बाहर का, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से आया हो या किसी और पार्टी से, ताजपोशी हो सकती है।

भाजपा के इन चार नेताओं में सबसे पहले हिमंत बिस्वा सरमा भाजपा में आए थे और मुख्यमंत्री भी सबसे पहले बने। उनके बाद आए मानिक साहा, सम्राट चौधरी और सुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने का नंबर उनके भाजपा में शामिल होने के क्रम में ही आया है। इन चार नेताओं में हिमंत और मानिक इस मामले में बाकी दो से अलग हैं कि उनके पिता या परिवार की कोई राजनीतिक पहचान नहीं थी, जबकि सम्राट और शुभेंदु को पिता की सियासी पूंजी से बड़ी छलांग मिली।

हिमंत बिस्वा सरमा 28 अगस्त 2015 को भाजपा में शामिल हुए। बीजेपी में आने से पांच दिन पहले 23 अगस्त को हिमंत दिल्ली में पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह से मिलकर एंट्री की हरी झंडी ले चुके थे। कामरूप महानगर जिले की जलुकबारी विधानसभा सीट से लगातार छठी बार चुनाव में जीते हिमंत पहला तीन चुनाव कांग्रेस से जीते और तरुण गोगोई सरकार में 2002 से 2014 में पार्टी छोड़ने तक मंत्री बने रहे।

गोगोई सरकार में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले हिमंत के मन में सीएम बनने की चाह थी, जो गौरव गोगोई के राजनीति में आने के बाद कांग्रेस में रहकर पूरी होती नहीं दिख रही थी। भाजपा में आने के बाद हिमंत ने 2016 के चुनाव में भाजपा के लिए काम किया। भाजपा 2011 में जीती 5 सीट से सीधे 60 सीटों पर पहुंच गई और असम में भाजपा की पहली सरकार बनी। सर्वानंद सोनोवाल सरकार में नंबर 2 बनकर हिमंत धैर्य के साथ अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

2021 के चुनाव में भाजपा दोबारा 60 सीट जीती और हिमंत बिस्वा सरमा 10 मई 2021 को पहली बार सीएम बन गए। भाजपा में शामिल होने के लगभग 6 साल बाद और महीने में जोड़ें तो 5 साल 9 महीने बाद हिमंत असम की उस कुर्सी पर बैठ गए, जहां कांग्रेस में रहते पहुंचने में गोगोई के अलावा राहुल गांधी भी बाधा होते। 2026 के चुनाव में हिमंत ने भाजपा को 60 से 82 सीटों तक पहुंचा दिया और अब लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बन गए हैं।

Himanta Biswa Sarma Joining BJP 28 August 2015

बिहार में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से बिना एमएलए या एमएलसी बने ही राबड़ी देवी सरकार में मंत्री बन गए सम्राट चौधरी राजद छोड़ने और भाजपा पहुंचने से पहले अपने पिता और बिहार के कद्दावर नेता शकुनी चौधरी के साथ नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में भी रहे। शकुनी राजद से पहले कांग्रेस और समता पार्टी में थे और जदयू के बाद हम के प्रदेश अध्यक्ष भी बने। 2015 के चुनाव में हम की हार के बाद राजनीति छोड़ दी। सम्राट ने 11 जून 2017 को भाजपा का दामन थामा। तब बिहार बीजेपी अध्यक्ष रहे नित्यानंद राय और सुशील मोदी ने यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में सम्राट को भाजपा में शामिल किया। राजद के पतन के बाद से सम्राट का थमा करियर भाजपा में आते ही तेजी से ऊपर चढ़ने लगा।

सम्राट चौधरी 2018 में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष, 2020 में विधान पार्षद (एमएलसी), फिर आगे विधान परिषद में पार्टी के नेता बने। 2023 में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बने। नीतीश कुमार जब दूसरी बार महागठबंधन छोड़कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में लौटे तो 28 जनवरी 2024 को नंबर 2 की हैसियत वाले डिप्टी सीएम बने। नीतीश के मैदान में डटे रहने के कारण सम्राट लगभग 6 साल में सीएम तो नहीं बन सके, लेकिन बिहार भाजपा के अंदर सीएम-इन-वेटिंग की लाइन में सबसे आगे खड़े हो गए। महीने में जोड़ें तो 6 साल 7 महीने में सम्राट की आधी ताजपोशी हो गई।

2025 में एनडीए की जीत के बाद गृह मंत्रालय वाला डिप्टी सीएम बनकर सम्राट चौधरी ने यह संदेश दे दिया कि अगली बारी उनकी है। नीतीश कुमार ने जब मार्च में राज्यसभा जाने का ऐलान किया तो सम्राट की ताजपोशी का रास्ता खुल गया। रेस में नित्यानंद राय समेत कई नाम चले, लेकिन सीएम-इन-वेटिंग की लाइन में 2024 से दौड़ रहे सम्राट से आगे कोई नहीं निकल सका। 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बन गए।

Samrat Choudhary Joins BJP 11 June 2017

शुभेंदु अधिकारी अपने पिता शिशिर अधिकारी के पीछे-पीछे कांग्रेस से राजनीति में आए। शिशिर कांग्रेस और टीएमसी के बड़े नेता रहे और केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री भी बने। शुभेंदु के पीछे उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी भी विधायक और सांसद बने। अधिकारी परिवार ने कांग्रेस के बाद ममता बनर्जी की ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के साथ दो दशक तक राजनीति की। शुभेंदु ममता के साथ रहकर विधायक, सांसद और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री बने। ममता के दल में अभिषेक बनर्जी की सक्रियता बढ़ने के बाद उनका भी मोहभंग होने लगा, क्योंकि आगे का रास्ता धुंधला दिखने लगा। ऐसा ही असम में हिमंत बिस्वा सरमा के साथ गौरव गोगोई के आने से हुआ था। शुभेंदु ने भाजपा की राह पकड़ी तो शिशिर और दिव्येंदु भी भाजपा के हो गए।

शुभेंदु की भाजपा में एंट्री हिमंत और सम्राट से ज्यादा ताकतवर रही, क्योंकि उनको पार्टी में शामिल करने खुद अमित शाह मेदिनपुर गए थे। 19 दिसंबर 2020 को भाजपा में आए शुभेंदु ने उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2021 में शुभेंदु ने तत्कालीन सीएम ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हरा दिया। सीएम बनने के लिए ममता को भवानीपुर से उप-चुनाव लड़ना पड़ा। शुभेंदु ने अगले 5 साल गुंडाराज, हर काम में अवैध वसूली और मुसलमानों के तुष्टीकरण का सवाल उठाकर ममता बनर्जी और टीएमसी की साख कमजोर कर दी। शुभेंदु ने 2026 के चुनाव में ममता को भवानीपुर में जाकर हराया और नंदीग्राम सीट भी जीती। बीजेपी ने दो तिहाई से अधिक सीटें जीतकर ममता के गढ़ को ध्वस्त कर दिया। 9 मई को शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री बन गए। भाजपा में एंट्री से सीएम बनने तक शुभेंदु को भी लगभग 6 साल लगे। महीने में गिन लें तो 5 साल 5 महीने।

Suvendu Adhikari Joins BJP 19 December 2020

भाजपा में आने के बाद लगभग 6 साल में सीएम बनने वालों में त्रिपुरा के सीएम मानिक साहा की भी गिनती होती है। 2016 में कांग्रेस से भाजपा में आए मानिक साहा को 6 साल बाद 2022 में बिप्लब देब की जगह पर सीएम बनाया गया था। 2023 में वो दोबारा सीएम बनाए गए। हिमंत बिस्वा सरमा, सम्राट चौधरी, शुभेंदु अधिकारी और मानिक साहा के अलावा भी कई नेता हैं, जो दूसरे दल से आने के बाद सीएम बने हैं। कुछ सीएम रहते पाला बदलकर आ गए और पद पर बने रहे। कुछ चुनाव से पहले आकर मुख्यमंत्री बन गए। कुछ का इंतजार कई साल में पूरा हुआ।

कर्नाटक में जनता दल से 2008 में भाजपा में आए बसावराज बोम्मई को 13 साल बाद यानी 2021 में सीएम बनाया गया। लेकिन मणिपुर में कांग्रेस छोड़कर 2016 में भाजपा में आए एन बीरेन सिंह ने 2017 के चुनाव के बाद ही सीएम की कुर्सी हासिल कर ली। अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू जुलाई 2016 में कांग्रेस सरकार के सीएम बने, सितंबर में पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में गए और उसके सीएम बने और फिर दिसंबर में भाजपा में शामिल होकर उसके भी सीएम बने रहे।

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