बंगाल में हो सकता है महाराष्ट्र वाला खेला? TMC के शिंदे बनेंगे ऋतब्रत बनर्जी; पार्टी सिंबल पर भी खतरा
1998 में ममता बनर्जी द्वारा स्थापित की गई तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। ममता बनर्जी ने भाजपा पर पार्टी को तोड़ने के आरोप लगाए हैं। इस वक्त TMC के 80 विधायक हैं। टूट के लिए 53 की जरूरत है।

पश्चिम बंगाल में हुए हालिया विधानसभा चुनावों में 15 साल तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद अब उसके अस्तित्व पर ही संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दावा किया जा रहा है कि TMC के 80 में से 50 विधायक पार्टी तोड़ सकते हैं और नया गुट बना सकते हैं। दावे इस बात के भी किए जा रहे हैं कि बागी गुट TMC के चुनाव चिह्न (पार्टी सिंबल) पर भी दावा ठोक सकता है। यह चर्चा अनायास नहीं है बल्कि इसके पीछे TMC के हालिया कदम हैं, जिसके तहत पार्टी ने विपक्ष के नेता की नियुक्ति में कथित तौर पर जाली हस्ताक्षरों को लेकर विवाद में दो विधायकों (ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा) को TMC से निष्कासित कर दिया है।
इस कदम के बाद ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में पार्टी विधायकों का एक बड़ा खेमा TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी की बैठकों से किनारा कर रहा है। आज (मंगलवार, 2 जून को) जब ममता ने कोलकाता में धरना-प्रदर्शन दिया, तब भी वहां अधिकांश विधायकों की उपस्थिति नदारद रही। केवल छह विधायक और तीन सांसद ही वहां मौजूद थे। दूसरी तरफ बागी गुट गुप्त बैठकें कर रहा है। इन्हीं वजहों ने TMC के भीतर बगावत की अटकलों को और हवा दे दी है। बंगाल में उपजी इस राजनीतिक स्थिति की तुलना महाराष्ट्र से की जा रही है, जब शिव सेना में टूट हुई थी। तब एकनाथ शिंदे ने बगावत कर शिवसेना को तोड़ दिया था और पार्टी सिंबल पर कब्जा कर लिया था। TMC के निलंबित राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता ने इंडिया टुडे को बताया है कि बागी गुट TMC और उसके चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोकने की कोशिश कर सकता है।
लड़ाई नेता विपक्ष की नियुक्ति से शुरु हुई
दरअसल, ये लड़ाई नेता विपक्ष की नियुक्ति से शुरु हुई है। TMC के कई नवनिर्वाचित विधायक चाहते थे कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) के पद पर ऋतब्रत बनर्जी को नियुक्त किया जाए। हालांकि, ममता के नेतृत्व वाली TMC की शीर्ष नेतृत्व ने LoP के पद के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव रखा। कहा जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी ने जो चिट्ठी विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी थी, उस पर ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने दस्तखत नहीं किए थे। इसकी जब शिकायत की तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। अब वही ऋतब्रत बनर्जी अलग गुट का नेतृत्व कर रहे हैं।
50 विधायकों ने बैठक की
अब पार्टी के निलंबित प्रवक्ता ऋजु दत्ता के दावों ने इस कयासबाजी को और हवा दे दी है कि ममता बनर्जी अपनी तीन दशक पुरानी पार्टी पर नियंत्रण खोने वाली हैं। ऋजु दत्ता का दावा है कि ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 50 विधायकों ने बैठक की है और अपने गुट को 'असली तृणमूल कांग्रेस' बताकर पार्टी के प्रतिष्ठित 'जोड़ा फूल' (Twin Flower) सिंबल पर दावा करने की तैयारी में हैं। बता दें कि 1998 में TMC की स्थापना के बाद पहली बार पार्टी अपने सबसे बड़े आंतरिक मतभेद से जूझ रही है।
आंकड़ों का खेल और दलबदल कानून
इस वक्त पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायक हैं। दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए किसी भी बागी गुट को कम से कम दो-तिहाई विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है, जो टीएमसी के मामले में लगभग 53 विधायक बैठता है। ऋजु दत्ता का 50 विधायकों का दावा इस जादुई आंकड़े के बेहद करीब है।
80 में से 60 विधायक शामिल नहीं हुए
रविवार को ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के 80 में से 60 विधायक शामिल नहीं हुए, जिसने बगावत की खबरों को और पुख्ता कर दिया है। इसलिए ये कयास भी लगाए जा रहे हैं को दो तिहाई विधायकों का संख्या बल आसानी से जुटाया जा सकता है। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके करीबी कुणाल घोष ने पार्टी में दरार की बात स्वीकार की है। ममता बनर्जी ने फेसबुक लाइव के जरिए आरोप लगाया कि उनके विधायकों पर पुलिस के माध्यम से दबाव बनाया जा रहा है। वहीं, कुणाल घोष ने विधायकों से "हाथ जोड़कर" अपील की है कि वे ममता बनर्जी की तस्वीर के दम पर चुनाव जीते हैं और उन्हें गुमराह नहीं होना चाहिए।
क्या होगा टीएमसी का भविष्य?
बड़ी बात यह भी है कि ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने बीती रात कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों से मुलाकात की है। लिहाजा, सियासी जानकारों का कहना है कि अगर TMC में यही स्थिति बनी रही, तो 18 जून से शुरू होने वाले बजट सत्र तक पार्टी बिखर सकती है। हालांकि ऋतब्रत बनर्जी ने फिलहाल अलग पार्टी बनाने की योजना से इनकार किया है, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि "तृणमूल में बोलने की जगह नहीं बची है" और पार्टी "खत्म होने की राह पर है।"




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