Bengal Election Humayun Kabir Building Babri Masjid and Owaisi have formed an Alliance Tension for Mamata Banerjee बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ बनवा रहे हुमायूं कबीर और ओवैसी का हुआ गठबंधन, ममता को कितनी टेंशन?, India News in Hindi - Hindustan
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बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ बनवा रहे हुमायूं कबीर और ओवैसी का हुआ गठबंधन, ममता को कितनी टेंशन?

एआईएमआईएम और हुमायूं कबीर साथ मिलकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। ओवैसी ने रविवार को यह ऐलान किया है। कबीर बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ बनवाने को लेकर सुर्खियों में आए हैं।

Sun, 22 March 2026 10:53 PMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ बनवा रहे हुमायूं कबीर और ओवैसी का हुआ गठबंधन, ममता को कितनी टेंशन?

एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन में लड़ेगी। कबीर तृणमूल कांग्रेस के सस्पेंडेड विधायक हैं और हाल ही में आम जनता उन्नयन पार्टी बनाई है। कबीर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद भी बनवा रहे हैं, जिसको लेकर हुए विवाद के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था।

पिछले कई दिनों से अटकलें लग रही थीं कि हुमायूं कबीर और एआईएमआईएम बंगाल चुनाव में साथ मिलकर लड़ सकते हैं। कबीर ने पार्टी का गठन करने के बाद कई बार सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि दोनों दलों के बीच गठबंधन पर बात चल रही है। रविवार को हैदराबाद में ओवैसी ने इस गठबंधन की पुष्टि कर दी और कहा कि 25 मार्च को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करके और जानकारी दी जाएगी।

ममता बनर्जी को कितनी टेंशन?

बंगाल की राजनीति पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों (हुमायूं और ओवैसी) नेताओं की नजरें राज्य के अल्पसंख्यक मतदाताओं पर हैं। इसके जरिए ममता बनर्जी की टीएमसी को मिलने अल्पसंख्यक वोटों में कुछ हद तक सेंधमारी हो सकती है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पहली बार पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने जा रहे हुमायूं कबीर का दल अल्पसंख्यक वोटों का कितना भरोसा हासिल कर सकता है। पिछले कुछ सालों के वोटिंग पैटर्न को देखें तो राज्य में अल्पसंख्यक वोटों का बड़ा हिस्सा लेफ्ट से खिसकते हुए ममता बनर्जी की ओर गया है। अब पहले मुर्शिदाबाद में हुमायूं ने बाबरी मस्जिद जैसी एक मस्जिद बनाने का ऐलान किया और अब ओवैसी के साथ गठबंधन करके वे अल्पसंख्यक वोटों को पाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल की आबादी में मुसलमानों की संख्या लगभग 27 प्रतिशत है और मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में उनकी अच्छी-खासी आबादी है। ऐसे में संभावना है कि कुछ फीसदी वोटों पर इस गठबंधन का प्रभाव पड़ सकता है, जिससे ममता बनर्जी की टीएमसी को थोड़ी-बहुत टेंशन हो सकती है।

182 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में कबीर

कबीर का कहना है कि उनकी पार्टी राज्य भर में 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा, "हमने मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों से उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। बाकी सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा 22 मार्च को की जाएगी।" कबीर ने बताया कि उनकी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम के बीच चुनावी समझौता हो गया है। कबीर ने कहा कि त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में उनकी पार्टी निर्णायक भूमिका निभाएगी, लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि वह भाजपा या तृणमूल का समर्थन करेंगे, या नहीं। उन्होंने कहा कि वह इस बार दो सीट - रेजिनगर और नाओदा से चुनाव लड़ेंगे। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा।

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बाबरी मस्जिद निर्माण को भावनात्मक मुद्दा मानते हैं कबीर

हुमायूं कबीर का मानना है कि मुर्शिदाबाद में नई बाबरी मस्जिद के निर्माण का मुद्दा एक भावनात्मक मुद्दा है और यह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि देश की आजादी के बाद, पहली बार राज्य में शासन की बागडोर एक मुस्लिम मुख्यमंत्री के हाथों में होगी, या इस समुदाय से उपमुख्यमंत्री होगा। कबीर ने कहा, ''अगर हमारी पार्टी सरकार बनाती है तो पहली बार कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री बनेगा। लेकिन अगर हम सरकार नहीं भी बनाते हैं तो भी हमारे पास इतना संख्या बल होगा कि हमारे बिना कोई सरकार नहीं बन पाएगी।''