मजाक मत बनाओ, एंजेल चकमा के हत्यारे पर 25 हजार के इनाम से भड़का टिपरा मोथा, कहा- 10 लाख देंगे
नस्लीय हिंसा में मारे गए एंजेल चकमा के हत्यारे के सिर पर उत्तराखंड पुलिस ने 25 हजार का इनाम रखा है। इससे गुस्साए टिपरा मोथा चीफ ने कहा है कि यह हमारे साथ मजाक है, हम 10 लाख देंगे।

Angel Chama Racist Killing: देहरादून नस्लीय हिंसा में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले में गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच टिपरा मोथा सुप्रीमो प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने सोमवार को उत्तराखंड पुलिस की आलोचना की कि यह हमारे साथ मजाक है, क्या एंजेल के हत्यारे को पकड़ने की कीमत 25 हजार है? ऐलान किया कि मुख्य आरोपी को जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर हम 10 लाख रुपये देंगे।
माणिक्य देबबर्मा का यह ऐलान उत्तराखंड पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये के इनाम की घोषणा के बाद आया है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में देबबर्मा ने कहा, “क्या एक एमबीए के अंतिम वर्ष के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी की कीमत सिर्फ 25 हजार रुपये है? यह हमारे साथ मजाक है। जो व्यक्ति एंजेल चकमा के हत्यारे की गिरफ्तारी में सुराग देगा, उसे मैं 10 लाख रुपये दूंगा।"
देहरादून नस्लीय हमले में मारा गया एंजेल चकमा
24 वर्षीय एंजेल चकमा, पश्चिम त्रिपुरा जिले के नंदननगर का रहने वाला था और एमबीए का छात्र था। 9 दिसंबर को देहरादून में नस्लीय टिप्पणी का विरोध करने पर उस पर छह लोगों ने हमला किया था। गंभीर रूप से घायल एंजेल ने इलाज के दौरान 26 दिसंबर को दम तोड़ दिया। पुलिस के अनुसार, मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि मुख्य आरोपी अब भी फरार है। बताया गया है कि आरोपियों ने एंजेल को चीनी कहकर चिढ़ाया था। विरोध करने पर चाकू से गोद दिया।
मृतक परिवार को आर्थिक मदद भी
इधर, टिपरा मोथा पार्टी द्वारा संचालित त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) ने भी मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। परिषद ने एंजेल चकमा के परिजनों को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया है।
इस हत्याकांड को लेकर त्रिपुरा से लेकर उत्तराखंड तक आक्रोश का माहौल है और लगातार निष्पक्ष जांच व सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। मृतक के परिवार और समर्थकों का कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।




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