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अदालत नैतिकता से नहीं, कानून से चलती है; यूपी के लिव इन केस में HC की दोटूक

बेंच ने कहा, 'नैतिकता और कानून को अलग रखना होगा। यदि किसी चीज को कानून में अपराध नहीं माना गया है तो फिर तो फिर नैतिकता और समाज की राय हमारे फैसले को प्रभावित नहीं कर सकते हैं। अदालत का यह कर्तव्य है कि वह नागरिक के सुरक्षा के अधिकार की रक्षा करे।'

Fri, 27 March 2026 02:20 PMSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अदालत नैतिकता से नहीं, कानून से चलती है; यूपी के लिव इन केस में HC की दोटूक

अदालत समाज की नैतिकता से नहीं बल्कि कोर्ट से चलती है। इसलिए समाज क्या कहता है, यह सोचकर हम नागरिकों के सुरक्षा के अधिकार से मुंह नहीं मोड़ सकते। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक विवाहित शख्स के दूसरी महिला के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने के मामले को लेकर यह अहम टिप्पणी की। अदालत ने लिव इन में रहने वाले कपल की सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। दोनों का कहना था कि उन्हें महिला के परिवार वालों से सुरक्षा का खतरा है, जिससे लिव इन में रहने वाले शख्स की शादी हुई थी। इसी मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना ने कहा कि भारत की व्यवस्था में विवाहित शख्स के लिव इन में रहने को अपराध नहीं माना गया है।

बेंच ने कहा कि यदि वह शख्स किसी के साथ जबरन लिव इन में नहीं है तो फिर उसे किसी अपराध के दायरे में नहीं रखा जा सकता। बेंच ने कहा, 'नैतिकता और कानून को अलग रखना होगा। यदि किसी चीज को कानून में अपराध नहीं माना गया है तो फिर तो फिर नैतिकता और समाज की राय हमारे फैसले को प्रभावित नहीं कर सकते हैं। अदालत का यह कर्तव्य है कि वह नागरिक के सुरक्षा के अधिकार की रक्षा करे।' लिव इन में रहने वाले शख्स की पत्नी के वकील का कहना था कि वह जब पहले से ही शादीशुदा है तो किसी और महिला के साथ रहना अपराध है। इस पर अदालत ने कहा कि सामाजिक नैतिकता और कानून को अलग-अलग करके देखना होगा।

अदालत ने सुनवाई के दौरान शख्स के साथ लिव इन में रहने वाली महिला के आवेदन का जिक्र किया। बेंच ने कहा कि महिला ने शाहजहांपुर के एसपी को लिखकर दिया है कि वह वयस्क है और अपनी मर्जी से शख्स के साथ लिव इन में रह रही है। बेंच ने कहा कि शख्स की पत्नी और उसके परिजनों को इस रिश्ते से आपत्ति है और उन्होंने जान से मारने की धमकी दी है। इन लोगों का ऐसा कहना है और ये सुरक्षा की गुहार लेकर यहां पहुंचे हैं। अदालत ने कहा कि लिव इन में रहने वाले दोनों लोगों ने संयुक्त एफिडेविट भी दिया है। इसके अलावा एसपी ने उस लेटर के आधार पर ही कोई ऐक्शन नहीं लिया है, जबकि उसका यह कर्तव्य है कि वह दो वयस्कों की सुरक्षा के अधिकार की रक्षा करे।

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एसपी को आदेश- कपल की सुरक्षा, आपकी जिम्मेदारी है

अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 8 अप्रैल की तारीख तय की है। इसके अलावा बेंच ने महिला के परिवार को आदेश दिया है कि वह लिव इन में रहने वाले कपल को नुकसान ना पहुंचाएं। इसके अलावा उनके घर में एंट्री करने या फिर सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर कोई संबंध स्थापित करने से भी रोका है। यही नहीं अदालत ने जिले के एसपी को आदेश दिया है कि वह निजी तौर पर इस कपल की सुरक्षा की व्यवस्था देखें। उन्हें किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए और उनकी सुरक्षा बरकरार बनी रहे। इसका ख्याल रखना होगा।

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