भोजशाला को HC ने बताया मंदिर तो ओवैसी को याद आया बाबरी वाला फैसला, क्या बोले
अदालत ने विवादित परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर करार दिया है और यहां मुसलमानों के नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख को इस पर ‘बाबरी मस्जिद फैसले’ की याद आ गई।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला दिया। अदालत ने विवादित परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर करार दिया है और यहां मुसलमानों के नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख को इस पर ‘बाबरी मस्जिद फैसले’ की याद आ गई। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में फैसला पलटने की उम्मीद भी जाहिर की है।
असदुद्दीन ओवैसी ने भोजशाला फैसले पर पहली प्रतिक्रिया में कहा, ‘हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसे सुलझाएगा और इस आदेश को पलट देगा। बाबरी मस्जिद के फैसले से स्पष्ट समानताएं हैं।’ हाई कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने आदेश के अध्ययन के बाद सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।
ओवैसी की पार्टी के ही नेता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष शोएब जमई ने कहा कि एक और दरगाह को मंदिर घोषित कर दिया गया है। उन्होंने इसे चिंताजनक बताया। जमई ने लिखा,' मध्य प्रदेश में मीलार्ड ने 800 साल पुरानी मस्जिद और दरगाह को मंदिर घोषित कर दिया गया। यह बेहद ही चिंताजनक मामला हैय़ खुलेआम 1991 के प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पुरानी मस्जिदों को निशाना बनाने वाले पेशेवर हिंदुत्ववादी वकीलों का गिरोह फिर से कामयाब रहा।'
अदालत ने क्या दिया है फैसला
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर के मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि स्मारक की धार्मिक प्रकृति देवी सरस्वती के मंदिर की है। हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर फैसला सुनाया।
मस्जिद को लेकर अदालत ने कहा- आवेदन पर कानून के मुताबिक सरकार करे फैसला
खंडपीठ ने कहा,'भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद के विवादित परिसर का धार्मिक चरित्र वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर के रूप में तय किया जाता है।'अदालत ने विवादित स्मारक में एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट और रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य दस्तावेजों के हवाले से कहा कि स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज से जुड़ा था। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी जिले में मस्जिद बनाने के लिए जमीन आवंटन की अर्जी देती है, तो राज्य सरकार इस पर कानूनी प्रावधानों के मुताबिक विचार कर सकती है।




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