TMC के 20 MPs ने बगावत तो कर दी लेकिन LS में फंस गया पेच? स्पीकर क्यों मौन, क्या कहता है 91वें संशोधन का नियम
TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से अधिकतर ने पहले ही राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग समूह का गठन कर लिया है।

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें थमती नहीं दिख रहीं। 80 में से 58 विधायकों द्वारा अलग गुट बनाए जाने के बाद लोकसभा में भी 28 में से 20 सांसदों ने अलग गुट बनाने का दावा किया है। इस बीच एक और सांसद ने TMC से इस्तीफा दे दिया है। आज बुधवार (10 जून) को पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पूर्व कांग्रेस नेता देव कुछ साल पहले ही TMC में शामिल हुई थीं। उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की और सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वह इस सप्ताह इस्तीफा देने वाली तृणमूल की दूसरी सांसद हैं। इससे पहले, सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था।
दूसरी तरफ, लोकसभा में TMC की चीफ व्हिप पद को लेकर घमासान मचा हुआ है। बागी गुट ने जहां काकोली घोष दस्तीदार को चीफ व्हिप घोषित किया है, वहीं ममता बनर्जी ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाते हुए कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप नियुक्त किया है। ममता बनर्जी की तरफ से इस आशय का एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखा गया है और इसे तुरंत लागू करने का अनुरोध किया गया है।
लोकसभा अध्यक्ष फिलहाल मौन
अब गेंद लोकसभा अध्यक्ष के पाले में है लेकिन वह फिलहाल इस मुद्दे पर मौन हैं। दरअसल, उनकी चुप्पी की वजह कानून है, जिसके तहत बागी गुट को मान्यता देने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष को नहीं है। लोकसभा के पूर्व महासचिव और संसदीय मामलों के विशेषज्ञ पीडीटी आचारी के मुताबिक, संविधान के 91वें संशोधन के बाद लोकसभा स्पीकर के पास किसी भी संसदीय दल से टूटे हुए बागी गुट को अलग दल या समूह के रूप में मान्यता देने का कोई अधिकार नहीं है। बकौल आचारी, TMC के बागी गुटों के मामले में फिलहाल न तो स्पीकर की कोई स्पष्ट भूमिका है और न ही चुनाव आयोग की इसमें कोई भूमिका नजर आती है।
तो फिर स्पीकर की भूमिका कब?
आचारी के मुताबिक, बागी सांसद तकनीकी रूप से अभी भी TMC के सांसद हैं और केवल दो स्थितियों में ही स्पीकर इस मामले में दखल दे सकते हैं। पहली स्थिति तब बनती है, जब बागी गुट नियमानुसार अपने समूह का विलय भाजपा या किसी अन्य दल में कर लेते हैं तब स्पीकर उसे मान्यता दे सकते हैं। दूसरी स्थिति तब बनती है, जब TMC अध्यक्ष ममता बनर्जी खुद स्पीकर को यह लिखकर दें कि इन लोगों ने दल-बदल किया है या दल को छोड़ दिया है, इसलिए उन सभी को अयोग्य घोषित करते हुए इनकी सदस्यता रद्द की जाए। तब स्पीकर उन सांसदों की अयोग्यता पर फैसला कर सकते हैं।
चुनाव आयोग की क्या और कब भूमिका
नियमानुसार, मौजूदा मामले में चुनाव आयोग की भी कोई भूमिका नहीं है, जब तक कि दोनों गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर आधिकारिक तौर पर अलग-अलग दावा पेश नहीं करते। ऐसी स्थिति में यह मामला चुनाव आयोग के पास जाएगा और तब चुनाव आयोग नियमानुसार उस पर अपना फैसला सुनाएगा।
सोनिया से मिलीं ममता, विलय की चर्चा
इस बीच, मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात की भी चर्चा हो रही है कि सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में करने की पेशकश की है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई बयान नहीं आया है। सूत्रों के हवाले से ABP की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अभिषेक बनर्जी ने TMC के विलय के मुद्दे पर राहुल गांधी से मुलाकात की है और संभावित विलय पर चर्चा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि टीएमसी नेता ने कांग्रेस लीडरशिप के सामने इसके लिए कुछ मांगें रखी हैं, जिसमें ममता बनर्जी को राज्यसभा भेजना और सदन में नेता विपक्ष का पद देना शामिल है। हालांकि इस पर कांग्रेस की ओर से क्या कहा गया है, वो सामने नहीं आ पाया है।




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