yemen Ansarullah aka houthi rebels ready to support iran against US israel war बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में मचेगा खून-खराबा? ईरान के इशारे पर जंग में कूदने को तैयार अंसारुल्लाह, Middle-east Hindi News - Hindustan
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बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में मचेगा खून-खराबा? ईरान के इशारे पर जंग में कूदने को तैयार अंसारुल्लाह

पश्चिमी एशिया में तनाव अपने चरम पर है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यमन का हूती (अंसारुल्लाह) समूह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान के समर्थन में युद्ध में उतरने के लिए हाई अलर्ट पर है। पूरी खबर यहां पढ़ें।

Thu, 26 March 2026 02:26 PMAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, सना
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बाब अल-मंडेब स्ट्रेट में मचेगा खून-खराबा? ईरान के इशारे पर जंग में कूदने को तैयार अंसारुल्लाह

पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव और ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। यमन का अंसारुल्लाह अब ईरान के समर्थन में युद्ध के मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह से तैयार है। बता दें कि इससे पहले, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने कहा था कि अगर जंग जारी रहती है तो ईरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नए मोर्चे खोल सकता है। यह नया मोर्चा बाब अल-मंडेब स्ट्रेट हो सकता है। यह स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।

हाई अलर्ट पर अंसारुल्लाह

तस्नीम न्यूज एजेंसी ने एक 'जानकार सूत्र' के हवाले से बताया है कि यह समूह इस संघर्ष की शुरुआत से ही अत्यधिक हाई अलर्ट पर रहा है। 28 फरवरी को शुरू हुई जंग के पहले दिन से ही अंसारुल्लाह पूरी तरह सतर्क है और युद्ध के मैदान में उतरने के लिए तैयार है।

हूती का दूसरा नाम- अंसारुल्लाह

अंसारुल्लाह को वैश्विक स्तर पर 'हूती' आंदोलन के नाम से जाना जाता है। यह यमन का एक प्रमुख जैदी शिया राजनीतिक और सशस्त्र सैन्य समूह है। 1990 के दशक में उत्तरी यमन के सादा प्रांत में एक धार्मिक पुनरुत्थान आंदोलन के रूप में उभरे इस संगठन का नाम इसके संस्थापक 'हुसैन बदरुद्दीन अल-हूती' के नाम पर पड़ा है। यह समूह वैचारिक रूप से पश्चिमी प्रभाव, विशेषकर अमेरिका और इजरायल के सख्त खिलाफ है और इसे मध्य पूर्व में ईरान के 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' यानी प्रतिरोध की धुरी का एक अहम रणनीतिक हिस्सा माना जाता है। साल 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा करने के बाद से यह संगठन वहां एक समानांतर सत्ता चला रहा है और हाल ही में गाजा संघर्ष के समर्थन में लाल सागर तथा बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक और सैन्य जहाजों पर हमलों के कारण यह वैश्विक भू-राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है।

बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की रणनीति

रिपोर्ट के अनुसार, यह हूती समूह संघर्ष में शामिल पक्षों अमेरिका और इजरायल पर दबाव बनाने के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण करके एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। सूत्र ने कहा कि दुश्मन को 'ठीक' करने के लिए इस जलमार्ग को नियंत्रित करना अब आवश्यक हो गया है। न केवल ईरान के पास इस जलमार्ग में एक 'विश्वसनीय खतरा' पैदा करने की क्षमता है, बल्कि अंसारुल्लाह के लड़ाके भी इसमें एक बड़ी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

हूतियों का पिछला रिकॉर्ड और नाकेबंदी

तस्नीम न्यूज की रिपोर्ट बताती है कि अंसारुल्लाह ने पहले भी यह साबित किया है कि बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करना और लाल सागर में अपने प्रतिरोध को स्थापित करना उनके लिए एक हासिल किया जा सकने वाला लक्ष्य है। 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमले और गाजा पट्टी में इजरायल के सैन्य अभियान के बाद, अंसारुल्लाह ने इजरायल से जुड़े या वहां जाने/आने वाले जहाजों की नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी थी।

इजरायल को आर्थिक नुकसान

इस नाकेबंदी से इजरायल की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि जहाजों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए लाल सागर की बजाय दक्षिणी अफ्रीका का लंबा चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा। नौसैनिक नाकेबंदी के अलावा, इस समूह ने इजरायली ठिकानों पर कई हवाई हमले किए और यमन तट के पास गश्त कर रहे अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को भी बार-बार निशाना बनाया।

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ईरान का रुख: प्रतिरोध जारी रहेगा

ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश अकारण अमेरिकी-इजरायली आक्रामकता के जवाब में प्रतिरोध की नीति का ही पालन करेगा। बुधवार को एक टेलीविजन इंटरव्यू में बोलते हुए अराघची ने कहा कि वर्तमान में, हमारी नीति प्रतिरोध जारी रखने की है, और कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने बाहरी आश्वासनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए बिना किसी ठोस गारंटी के किसी भी तरह की बातचीत या युद्धविराम की संभावना से साफ इनकार किया और स्पष्ट किया कि अभी कोई बातचीत नहीं चल रही है।

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