खार्ग द्वीप पर कब्जा करेगा अमेरिका? सेना उतारने की तैयारी, ईरान ने भी बिछा दिया 'मौत का जाल'
फारस की खाड़ी में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के हालात बन रहे हैं। अमेरिका खार्ग द्वीप पर कब्जे की तैयारी में है, वहीं ईरान ने द्वीप के चारों ओर बारूदी सुरंगें बिछाकर भीषण पलटवार की चेतावनी दी है।

हाल ही में अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों में दावा किया गया कि अमेरिका फारस की खाड़ी में अपनी जमीनी सेना उतारने जा रहा है और उसका संभावित लक्ष्य ईरान के प्रमुख खार्ग द्वीप पर कब्जा करना हो सकता है। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद ईरान ने अपनी सुरक्षा और कड़ी कर दी है। ईरानियों ने इस द्वीप पर बारूदी सुरंगें बिछाना शुरू कर दिया है और वहां अतिरिक्त सैन्य बल तैनात कर दिए हैं।
ईरान की सैन्य तैयारी
सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट में अज्ञात सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ईरान ने खार्ग द्वीप के चारों ओर एंटी-पर्सनेल (इंसानों को नुकसान पहुंचाने वाली) और एंटी-आर्मर (बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने वाली) बारूदी सुरंगों सहित कई जाल बिछाए हैं। यह वही जगह है जहां अमेरिकी सैनिक संभावित रूप से समुद्र के रास्ते हमला कर सकते हैं। खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि देश का लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप के जरिए होता है।
अमेरिका की रणनीति क्या है?
ट्रंप प्रशासन अमेरिकी सैनिकों का इस्तेमाल करके इस द्वीप पर कब्जा करने की योजना पर विचार कर रहा है। अमेरिका इसे एक दबाव के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है, ताकि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए मजबूर किया जा सके।
ईरान की कड़ी चेतावनी
इससे पहले, ईरान की संसद के अध्यक्ष एम.बी. गालिबाफ ने स्पष्ट किया था कि उन्हें दुश्मन देशों द्वारा ईरान के एक द्वीप पर कब्जा करने की तैयारियों की खुफिया रिपोर्ट मिली है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर चेतावनी देते हुए लिखा- कुछ खुफिया रिपोर्टों के आधार पर, ईरान के दुश्मन क्षेत्रीय देशों में से किसी एक के समर्थन से हमारे एक ईरानी द्वीप पर कब्जा करने की तैयारी कर रहे हैं। हमारी सेनाएं दुश्मन की सभी गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही हैं और यदि वे कोई भी कदम उठाते हैं तो उस क्षेत्रीय देश के सभी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाकर लगातार और अचूक हमले किए जाएंगे।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कड़ा बयान देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने प्रमुख युद्ध उद्देश्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह विफल रहा है, जिसमें त्वरित सैन्य जीत हासिल करना और तेहरान में सत्ता परिवर्तन लाना शामिल है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना का जमावड़ा
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत काफी बढ़ा दी है। उत्तरी कैरोलिना बेस से अमेरिकी सेना के 82वें एयरबोर्न डिवीजन के लगभग 2,000 अतिरिक्त सैनिकों को मध्य पूर्व की ओर जाने का आदेश दिया गया है। प्रशांत महासागर के दोनों छोरों से दो समुद्री अभियान इकाइयां पहले से ही रास्ते में हैं। इनमें जापान से 'त्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप' और सैन डिएगो से 'बॉक्सर एम्फीबियस रेडी ग्रुप' शामिल हैं। इन बैकअप बलों के आने से मध्य पूर्व में पहले से तैनात लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिकों में 6,000 से 7,000 नौसैनिकों और नाविकों की और वृद्धि हो जाएगी।
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