ईरान ने दी 'हथियार बाकी' की चेतावनी, क्या मिडिल ईस्ट में असली लड़ाई बाकी है?
ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों तथा ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच ईरानी रक्षा मंत्रालय की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लंबे युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है और उसने अभी तक अपने सबसे उन्नत हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया है।

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों तथा ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच ईरानी रक्षा मंत्रालय की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लंबे युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है और उसने अभी तक अपने सबसे उन्नत हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया है। आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, मंत्रालय के प्रवक्ता रजा तलाई-निक ने कहा कि हमारे पास दुश्मन द्वारा थोपे गए इस युद्ध का मुकाबला करने और उसके द्वारा निर्धारित समय से कहीं अधिक लंबे समय तक आक्रामक रक्षा जारी रखने की क्षमता है। उन्होंने आगे कहा कि हम शुरुआती दिनों में अपने सभी उन्नत हथियारों और उपकरणों को तैनात करने का इरादा नहीं रखते।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सुरक्षा बल ईरान को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, लेकिन सैन्य अभियान का सबसे तीव्र चरण अभी शुरू होना बाकी है। ट्रंप ने सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यह कार्रवाई 'बहुत प्रभावी' है और अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का पूरा उपयोग कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती हमलों में अमेरिका ने राजनीतिक और सैन्य हस्तियों सहित 49 ईरानी नेताओं को समाप्त कर दिया है।
ट्रंप ने कहा कि अगला चरण जल्द ही आने वाला है। उन्होंने इसे 'बड़ी लहर' करार देते हुए कहा कि हमने अभी तक उन्हें पूरी ताकत से नहीं मारा है। बड़ी कार्रवाई अभी बाकी है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान द्वारा बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात सहित अरब देशों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले 'सबसे बड़ा आश्चर्य' रहे। ट्रंप ने संघर्ष की अवधि पर कहा कि वह इसे लंबा नहीं चलने देना चाहते और उनका अनुमान है कि यह लगभग चार सप्ताह तक चलेगा।
इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि इज़राइल के साथ समन्वय में किए गए पूर्वव्यापी हमलों का उद्देश्य ईरानी खतरे को निष्क्रिय करना और अमेरिकी बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि अमेरिका को आशंका थी कि यदि इजरायल कार्रवाई करता तो ईरान अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमला करता, इसलिए पहले प्रहार किया गया। रुबियो ने कहा कि अभियान का मुख्य फोकस ईरान की कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और उसकी नौसेना से उत्पन्न खतरे को समाप्त करना है। अमेरिकी सेना ने इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की है, जबकि ईरानी रेड क्रिसेंट सोसायटी के अनुसार ईरान में 500 से अधिक लोग मारे गए हैं।
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