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जंग के बीच नरम पड़ा तेहरान, ईरान ने 'शर्त' के साथ खोले बातचीत के दरवाजे; मानेंगे ट्रंप?

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन केवल गरिमापूर्ण तरीके से और बिना किसी दबाव के। ईरान के सर्वोच्च नेता के विशेष प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि हम युद्ध रोकने के लिए तैयार हैं।

Tue, 3 March 2026 11:32 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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जंग के बीच नरम पड़ा तेहरान, ईरान ने 'शर्त' के साथ खोले बातचीत के दरवाजे; मानेंगे ट्रंप?

ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन केवल गरिमापूर्ण तरीके से और बिना किसी दबाव के। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता के विशेष प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि हम युद्ध रोकने के लिए तैयार हैं। हम बातचीत के लिए तैयार हैं। लेकिन बातचीत गरिमापूर्ण होनी चाहिए, न कि ईरान पर कोई दबाव डालने के लिए। हम अपनी रक्षा कर रहे हैं। हम सिर्फ अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, और कुछ नहीं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान शांति के बदले में भविष्य में हमलों को रोकने की गारंटी और प्रतिबंधों को हटाने की मांग करता है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हम इस स्थिति में कोई भी बातचीत के लिए तैयार नहीं है। हम पर हमला हो रहा है और हम बातचीत करें? लेकिन अगर वे युद्ध रोक दें और हमें यह गारंटी दें कि वे दोबारा हम पर हमला नहीं करेंगे, साथ ही ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा दें, तो हम बातचीत के लिए क्यों तैयार नहीं होंगे? हम शांति चाहते हैं।

अमेरिका पर युद्ध शुरू करने का आरोप

इलाही ने अमेरिका पर युद्ध शुरू करने का आरोप लगाया और उनसे इसे रोकने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे ही हम पर हमला कर रहे हैं और हमारे नागरिकों पर बमबारी कर रहे हैं; हम तो बस अपनी रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया है और इसे समाप्त करने की जिम्मेदारी अमेरिका की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने ही इसे शुरू किया है, और उन्हें ही इसे रोकना होगा; जब वे ऐसा करेंगे, तो हम भी रुक जाएंगे। इलाही ने बताया कि हालिया हमलों से पहले ईरान ओमान के माध्यम से अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा था।

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उन्होंने कहा कि हमें पिछले सप्ताह की घटनाओं पर गौर करना चाहिए। ईरान ने ओमान के माध्यम से अमेरिका के साथ बातचीत शुरू की थी और दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर थे। हम एक निष्कर्ष की ओर बढ़ रहे थे। दरअसल, अंतिम दिन ओमान के विदेश मंत्री ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एक महत्वपूर्ण अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि हमने इन चर्चाओं के माध्यम से काफी प्रगति की है और बहुत कुछ हासिल किया है। हम एक संयुक्त बयान जारी करने के कगार पर थे और हमें उम्मीद थी कि संघर्ष समाप्त हो जाएगा। इसके तुरंत बाद ही अमेरिका और इजरायल ने हम पर हमला कर दिया।

ट्रंप बोले- बहुत देर हो चुकी है

गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच स्थिति बेहद तेजी से बदल रही है। मंगलवार तक यह संघर्ष राजनयिक गतिरोध से बढ़कर एक उच्च-तीव्रता वाले हवाई अभियान ( ऑपरेशन एपिक फ्यूरी) में तब्दील हो गया है, जिसने ईरान के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रस्तावों को 'बहुत देर हो चुकी' बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सैन्य ढांचा (विशेष रूप से उसकी नौसेना, वायु सेना और हवाई रक्षा ) काफी हद तक नष्ट हो चुका है। ट्रंप ने कहा कि हालांकि वह 'अंततः' बातचीत कर सकते हैं, लेकिन सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह नष्ट नहीं कर दिया जाता।

शांति की तलाश में है तेहरान

दूसरी ओर, ईरान के रुख का बचाव करते हुए इलाही ने कहा कि तेहरान शांति की तलाश में है और राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमने कभी बातचीत की मेज नहीं छोड़ी; उन्होंने छोड़ी। उन्होंने ही हमारे खिलाफ इस युद्ध की शुरुआत की। संघर्ष और संकट के समय में, सुरक्षा और शांति सभी से छीन ली जाती है, और सभी प्रभावित होते हैं। मैं एक और बात कहना चाहता हूं। अमेरिका का अंतिम लक्ष्य केवल ईरान नहीं है। हमारी सरकार को निशाना बनाने के बाद, उनका इरादा अन्य देशों की ओर बढ़ने का है। जांच से संकेत मिला है कि निकट भविष्य में, सत्ता का महत्वपूर्ण हस्तांतरण अन्य देशों की ओर होगा।

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इलाही ने आगे आरोप लगाया कि अमेरिका भारत, चीन और रूस जैसे शक्तिशाली देशों के उत्थान को रोकने के लिए संघर्ष पैदा कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहता है और साझेदार नहीं चाहता, विशेषकर शक्तिशाली राष्ट्रों को। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र भारत, चीन, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका होंगे। हालांकि, अमेरिका कोई साझेदार नहीं चाहता; वह भारत या चीन को शक्तिशाली समकक्ष के रूप में उभरते हुए नहीं देखना चाहता। परिणामस्वरूप, वे इस बदलाव को रोकने और अपने वैश्विक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए इन युद्धों को भड़काते हैं।

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