ईरान की राजनीति का अनसुलझा राज, मोजतबा खामेनेई अब तक गुमनाम क्यों हैं?
सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को मार्च 2026 में नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किए गए छह सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन 56 वर्षीय धर्मगुरु अभी तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में हलचल मची हुई है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को मार्च 2026 में नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किए गए छह सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन 56 वर्षीय धर्मगुरु अभी तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। ईरानी मीडिया में उनके नाम से बयान पढ़े जा रहे हैं और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जा रहे हैं, जबकि सरकार ने उनके संदेश वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से निर्मित वीडियो फुटेज भी प्रसारित किए हैं। ऐसे में उनको लेकर अटकलों का बाजार गरम है।
दरअसल, पिछले महीने की रिपोर्ट्स के अनुसार, पिता की हत्या वाले हमलों में मोजतबा खामेनेई के पैर में फ्रैक्चर, बाईं आंख में चोट और चेहरे पर खरोंच आई थी। सवाल उठ रहा है कि क्या नए सर्वोच्च नेता को वास्तव में सक्रिय रूप से शासन चला पा रहे हैं? इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वाएज ने सीएनएन को बताया कि मोजतबा खामेनेई ऐसी स्थिति में नहीं दिख रहे जहां वे महत्वपूर्ण निर्णय ले सकें या वार्ताओं का सूक्ष्म प्रबंधन कर सकें। व्यवस्था उनका नाम केवल बड़े फैसलों पर अंतिम स्वीकृति के लिए इस्तेमाल कर रही है, न कि रणनीति बनाने के लिए।
वाएज ने आगे कहा कि अपने पिता के विपरीत, जो नियमित रूप से सार्वजनिक रूप से सामने आकर स्थिति पर टिप्पणी करते थे, मोजतबा की अनुपस्थिति ईरानी वार्ताकारों को आंतरिक आलोचना से बचाने का माध्यम बन गई है। उनके नाम से विचार व्यक्त करना एक सुरक्षा कवच का काम कर रहा है।
किसके हाथ में है ईरान की सत्ता?
सर्वोच्च नेता की सार्वजनिक गैरमौजूदगी के बीच ईरान की बची हुई राजनीतिक व्यवस्था ने निरंतरता दिखाने के लिए कुछ चुनिंदा नेताओं के इर्द-गिर्द एकजुटता प्रदर्शित की है। संसद के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के पूर्व कमांडर मोहम्मद बगेर गालिबाफ वर्तमान में ईरान के सबसे प्रमुख चेहरों में उभरकर सामने आए हैं। उन्होंने इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे और युद्धविराम पर पहले दौर की वार्ता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय संबोधन देकर जनता को ईरान के नेतृत्व की एकजुटता का आश्वासन दिया है। वार्ता में गालिबाफ के साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अन्य उच्चाधिकारी भी शामिल हुए।
मोजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी का असर घरेलू स्तर पर भी दिख रहा है। जब विदेश मंत्री अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग खोलने की घोषणा की, तो शासन समर्थकों ने उन पर तीखा हमला बोला और वाशिंगटन को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। इसी तरह, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अरब पड़ोसियों से माफी मांगने और आगे कोई हमला न करने की घोषणा के बाद आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। वहीं एक्सपर्ट बता रहे हैं कि मोजतबा खामेनेई की यह अनुपस्थिति ईरान की राजनीतिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है, जबकि देश अमेरिका के साथ युद्ध और परमाणु वार्ता के दोहरे संकट से जूझ रहा है।
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