Iran US War Updates Netanyahu acknowledged Israel has little influence over Trump on Tehran talks ईरान मुद्दे पर ट्रंप खुद ले रहे फैसले, इजरायल की पकड़ कमजोर; नेतन्याहू के 'प्रभाव' से हलचल, Middle-east Hindi News - Hindustan
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ईरान मुद्दे पर ट्रंप खुद ले रहे फैसले, इजरायल की पकड़ कमजोर; नेतन्याहू के 'प्रभाव' से हलचल

नेतन्याहू ने कहा कि समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके भंडार को लेकर इजरायल की गंभीर चिंताओं के बावजूद, इजरायल के पास फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति को प्रभावित करने का कोई रास्ता नहीं है।

Mon, 25 May 2026 09:12 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान मुद्दे पर ट्रंप खुद ले रहे फैसले, इजरायल की पकड़ कमजोर; नेतन्याहू के 'प्रभाव' से हलचल

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने माना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इजरायल का प्रभाव बेहद सीमित है। वाशिंगटन ईरान के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ता को आगे बढ़ा रहा है, जिसका मकसद लगभग तीन महीने से चले आ रहे क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने कहा कि समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके भंडार को लेकर इजरायल की गंभीर चिंताओं के बावजूद, इजरायल के पास फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति को प्रभावित करने का कोई रास्ता नहीं है। एक इजरायली अधिकारी ने बताया कि नेतन्याहू ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच हो रहे समझौता ज्ञापन पर भी आपत्ति जताई है।

प्रस्तावित शांति समझौते में ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलने के बदले अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और उसके बाद तेहरान की परमाणु गतिविधियों पर आगे की बातचीत शामिल है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि दोनों देश एक ऐसे समझौते के करीब पहुंच गए हैं, जो मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति की नींव रख सकता है। इस घटनाक्रम में इजरायल को काफी हद तक किनारे कर दिया गया है। वार्ता का फोकस होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित है।

इजरायल पर क्या बोला ईरान?

वहीं, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव कम करने वाली किसी भी प्रक्रिया को बाधित करने के अलावा इजरायल से कुछ और उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने अमेरिका में मौजूद युद्ध समर्थक समूहों (चाहे वे रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट) पर आरोप लगाया कि ये इजरायल के साथ गठजोड़ बनाए रखते हैं और अमेरिका को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अनावश्यक युद्धों में धकेलते हैं। बघाई ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान का जवाब देते हुए कहा कि ईरान ड्रोन और मिसाइलों पर पैसा इसलिए खर्च करता है क्योंकि उसे अपनी सुरक्षा और आक्रामक युद्धों से बचाव की जरूरत है। हाल के महीनों में ईरान दो बड़े युद्धों का सामना कर चुका है।

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उन्होंने अमेरिकी दावे कि वे ईरानी जनता की चिंता करते हैं, को सिरे से खारिज कर दिया। बघाई ने कहा कि वाशिंगटन दशकों से ईरानी जनता के खिलाफ प्रतिबंधों और दबाव की नीति अपनाता रहा है। ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर अमेरिका-इजरायल के हमले उसी जनता के प्रयासों और संसाधनों से बने हैं। प्रवक्ता ने यह भी साफ किया कि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता समाप्त करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए सबसे अहम बात अपने राष्ट्रीय हितों और जनता के अधिकारों की रक्षा करना है।

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