ईरान का अमेरिका पर पलटवार, ट्रंप के मिसाइल दावों को बताया 'बड़ा झूठ'
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में दावा किया कि तेहरान ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिकी धरती तक पहुंच सकती हैं। इस पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को अमेरिकी दावों को बड़े झूठ करार देते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया।

ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं उनके दावे को 'बड़े झूठ' की संज्ञा दी है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में दावा किया कि तेहरान ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिकी धरती तक पहुंच सकती हैं और ईरान अपनी 'नापाक परमाणु महत्वाकांक्षाओं' को फिर से आगे बढ़ा रहा है। इस पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को अमेरिकी दावों को 'बड़े झूठ' करार देते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों की संख्या को लेकर अमेरिका जो भी आरोप लगा रहा है, वह महज 'बड़े झूठ' की पुनरावृत्ति है। बाकाई ने स्पष्ट नहीं किया कि वे ठीक-ठीक किन दावों का जवाब दे रहे थे, लेकिन कुछ घंटे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ऐसी मिसाइलें बनाने की कोशिश कर रहा है जो अमेरिकी क्षेत्र तक पहुंच सकती हैं।
इस महीने अल जजीरा से बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि तेहरान के पास अमेरिका को सीधे निशाना बनाने की क्षमता नहीं है, लेकिन अगर वाशिंगटन हमला करता है तो ईरान मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कहा था?
दरअसल, अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि तेहरान के नेता अपनी 'नापाक परमाणु महत्वाकांक्षाओं' को फिर से आगे बढ़ा रहे हैं। वहीं, ईरान ने बार-बार इनकार किया है कि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह जोर देता है कि शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का उसका अधिकार है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि दिसंबर में शुरू हुए और 8-9 जनवरी को चरम पर पहुंचे विरोध प्रदर्शनों के दौरान ईरानी अधिकारियों ने 32000 लोगों को मार डाला। जबकि ईरानी अधिकारियों ने 3000 से अधिक मौतों को स्वीकार किया है, लेकिन उनका कहना है कि यह हिंसा अमेरिका और इजरायल द्वारा समर्थित 'आतंकवादी कृत्यों' के कारण हुई। अमेरिका स्थित मानवाधिकार समूह एचआरएएनए ने 7000 से अधिक मौतों का आंकड़ा दर्ज किया है और चेतावनी दी है कि कुल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
ट्रंप के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब ओमान की मध्यस्थता में वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर समझौते के लिए दो दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है, और तीसरा दौर गुरुवार को होने वाला है। अमेरिका ने ईरान से यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोकने की मांग की है, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय आतंकवादी समूहों को समर्थन देने के मुद्दों को भी हल करने की कोशिश की है, जिन्हें ईरान ने ठुकरा दिया है। गौरतलब है कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए ट्रंप ने मध्य पूर्व में एक महत्वपूर्ण नौसैनिक बल तैनात किया है।
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