Special CBI Court Mumbai verdict on Congress Leader Pawanraje Nimbalkar murder after 20 years 30 लाख की सुपारी, 20 साल और 128 गवाह! कांग्रेस नेता की हत्या के 20 साल बाद आज आएगा फैसला; क्या है पूरा मामला?, Maharashtra Hindi News - Hindustan
More

30 लाख की सुपारी, 20 साल और 128 गवाह! कांग्रेस नेता की हत्या के 20 साल बाद आज आएगा फैसला; क्या है पूरा मामला?

सीबीआई ने 2009 में चार्जशीट दाखिल कर पद्मसिंह पाटिल को मुख्य आरोपी बताया। जांच एजेंसी के मुताबिक हत्या राजनीतिक दुश्मनी का नतीजा थी और निंबालकर को मारने के लिए 30 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी।

Tue, 16 June 2026 10:19 AMJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान, मुंबई
share
30 लाख की सुपारी, 20 साल और 128 गवाह! कांग्रेस नेता की हत्या के 20 साल बाद आज आएगा फैसला; क्या है पूरा मामला?

महाराष्ट्र के लिए आज का दिन अहम है। करीब 20 साल के इंतजार के बाद कांग्रेस के उभरते नेता रहे पवनराजे निंबालकर की सनसनीखेज हत्या के मामले में मंगलवार को फैसला आ जाएगा। मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत इस मामले में आज अपना अंतिम फैसला सुनाने जा रही है। यह फैसला इसीलिए अहम है क्योंकि इस मामले में मुख्य आरोपी महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री और NCP के दिग्गज नेता डॉ. पद्मसिंह पाटील हैं। ऐसे में फैसले पर कद्दावर नेताओं की भी नजरें टिकी हुई हैं।

कांग्रेस नेता की हत्या करीब 20 साल पहले, 3 जून 2006 को हुई थी। जानकारी के मुताबिक पवनराजे निंबाळकर और उनके ड्राइवर समद काझी अपनी स्कोडा कार से मुंबई से धाराशिव की ओर जा रहे थे। तभी नवी मुंबई के कलंबोली के पास घात लगाए बैठे शार्पशूटरों ने उनकी गाड़ी को रोका और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इससे दोनों को मौके पर ही मौत हो गई। इस हत्याकांड ने पूरे महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया था।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:कांग्रेस में होगी दिग्गजों की घर वापसी? पार्टी तैयार, चर्चा में पवार का फॉर्मूला

कौन थे पवनराजे निंबालकर?

पवनराजे निंबालकर उस्मानाबाद जिले के एक प्रमुख कांग्रेस नेता थे। अपनी हत्या से पहले वह राज्य की राजनीति में तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे और क्षेत्र में पद्मसिंह पाटिल के वर्चस्व को चुनौती देने वाले नेता के रूप में उभर रहे थे। ट्रायल के दौरान दर्ज गवाहियों के मुताबिक शुरुआत में निंबालकर को पाटिल का समर्थन मिला था और उन्होंने टेरना शुगर फैक्ट्री और उस्मानाबाद जिला केंद्रीय सहकारी बैंक जैसी संस्थाओं में पद संभाले थे। लेकिन जैसे-जैसे निंबालकर का राजनीतिक प्रभाव बढ़ा, दोनों नेताओं के बीच संबंध खराब हो गए।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:सपा-कांग्रेस की दोस्ती में कांटा बने ओवैसी? खिचड़ी पकने से पहले ही क्यों खींचतान

क्यों करवाई हत्या?

हत्या के बाद मामले की जांच शुरू हुई। हालांकि निंबालकर परिवार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्वतंत्र जांच की मांग की। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। 2009 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर पद्मसिंह पाटिल को मुख्य आरोपी बताया। CBI के मुताबिक यह हत्या राजनीतिक रंजिश का नतीजा थी और निंबालकर को खत्म करने के लिए 30 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। हालांकि पाटिल ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:कुख्यात शूटर सत्यम भाजपा नेता की हत्या में भी वांटेड, पुलिस ने किया एनकाउंटर

पद्मसिंह पाटिल के अलावा कई अन्य लोग भी इस मामले में आरोपी हैं। इनमें कारोबारी सतीश मंडाडे, पूर्व पार्षद मोहन शुक्ला, पारसमल जैन, पूर्व आबकारी निरीक्षक शशिकांत कुलकर्णी, बसपा कार्यकर्ता कैलाश यादव और कथित शूटर दिनेश तिवारी, पिंटू सिंह और छोटे पांडे शामिल हैं। इनमें से एक आरोपी बाद में सरकारी गवाह बन गया।

अन्ना हजारे भी गवाहों में शामिल

अदालत को इस मामले में फैसले तक पहुंचने में लगभग 20 साल लग गए। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक 128 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें अन्ना हजारे भी शामिल थे। वहीं करीब दो दशकों से यह मामला धाराशिव जिले में निंबालकर और पाटिल गुटों के बीच कड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का प्रतीक बना हुआ है।