नासिक TCS में धर्मांतरण का 'डर्टी गेम'? महिला आयोग से लेकर SC और NIA तक पहुंचा मामला
नासिक के TCS-लिंक्ड BPO में जूनियर कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस केस में 8 गिरफ्तारियां हुई हैं और अब NCW, सुप्रीम कोर्ट, NIA और ATS भी मामले की जांच कर रहे हैं।

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़े एक बीपीओ (BPO) कार्यालय में यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और कथित धर्मांतरण का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने तूल पकड़ लिया है और अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) से लेकर सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) तक इस मामले की जांच और सुनवाई में शामिल हो गए हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की कार्रवाई
स्वतः संज्ञान और ऑन-साइट जांच: मीडिया की गंभीर रिपोर्ट्स को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग की एक विशेष टीम शुक्रवार, 17 अप्रैल को नासिक स्थित इस BPO कार्यालय का दौरा कर रही है ताकि मौके पर जाकर हालात का जायजा लिया जा सके।
जांच समिति का गठन: NCW ने 'राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990' की धारा 8 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए एक उच्च-स्तरीय तथ्य-अन्वेषण समिति का गठन किया है। इस पैनल में बॉम्बे हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व डीजीपी बी.के. सिन्हा, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा और NCW की वरिष्ठ समन्वयक लीलावती शामिल हैं। यह टीम घटना के कारणों की जांच करेगी और यह भी देखेगी कि स्थानीय प्रशासन ने इस पर क्या कदम उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
धर्मांतरण का आरोप: यौन उत्पीड़न के साथ-साथ इस मामले में कथित रूप से संगठित धर्मांतरण का आरोप भी है। इसे लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने शीर्ष अदालत में तर्क दिया है कि इस तरह से संगठित और धोखे से किए जा रहे धर्मांतरण भारत की संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता के लिए एक बड़ा खतरा हैं। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों से इन गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
पुलिस की कार्रवाई: FIR और गिरफ्तारियां
नासिक के पुलिस कमिश्नर संदीप कार्णिक ने बताया कि 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच देवलाली और मुंबई नाका पुलिस स्टेशनों में कुल नौ (9) अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं। ये शिकायतें कंपनी के नौ जूनियर कर्मचारियों द्वारा की गई थीं, जिनमें उन्होंने अपने सीनियर कर्मचारियों पर यौन शोषण, उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में एक महिला आरोपी फिलहाल फरार है जिसकी तलाश जारी है। इन 8 वरिष्ठ कर्मचारियों के खिलाफ गहराई से जांच करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी फंडिंग का एंगल (NIA व ATS की एंट्री)
मामले की गंभीरता: नासिक पुलिस का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक कार्यालय के भीतर हुए अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार बहुत गहरे जुड़े हो सकते हैं। पुलिस ने इस पूरे मामले की जानकारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ साझा की है। महाराष्ट्र का आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) और अन्य खुफिया एजेंसियां भी इस मामले की जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं इसके पीछे चरमपंथी संगठनों का हाथ या किसी प्रकार की विदेशी फंडिंग तो नहीं है। पुलिस को अब किसी भी संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पता लगाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों से इनपुट्स का इंतजार है। यह मामला अब केवल कार्यस्थल पर उत्पीड़न का नहीं रह गया है, बल्कि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे गंभीर मुद्दे जुड़ गए हैं, जिसकी जांच देश की कई प्रमुख एजेंसियां एक साथ कर रही हैं।




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