हिन्दू युवती का रोज़ा, अंडरकवर सफाई कर्मी की रेकी; नासिक में यूं ही न हुआ धर्मांतरण-यौन शोषण का भंडाफोड़
कंपनी में कुछ महिला कर्मचारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के मामले में गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन्हें अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पैसे मिले थे या नहीं।

महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के BPO सेंटर में हाल ही में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोपों के बाद हड़कंप मच गया है। इस मामले में अब तक 9 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं और पुलिस ने मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। अब जाकर वहां चल रहे गोरखधंधे का भांडाफोड़ हुआ है। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब फरवरी में नासिक पुलिस ने सच्चाई का पता लगाने के लिए अपने कांस्टेबलों को दो सप्ताह तक उस बीपीओ में हाउसकीपिंग स्टाफ (सफाई कर्मचारी) बनाकर तैनात किया था।
दरअसल, फरवरी में एक हिन्दू महिला कर्मचारी को रमज़ान के दौरान रोज़ा रखते हुए देखा गया, इसके बाद एक स्थानीय राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता ने नासिक शहर पुलिस से संपर्क किया। तब पुलिस ने वहां अंडरकवर दो स्टाफ को बतौर सफाई कर्मी तैनात किया। इसके बाद धीर-धीरे वहां चल रहे गोरखधंधे का पर्दाफाश हो गया। करीब 2 हफ्तों की निगरानी के बाद पुलिस को कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत मिले।
पहला केस: शादी का झांसा और रेप का आरोप
जांच के दौरान सामने आया कि कथित हिन्दू युवती का संबंध दानिश शेख नामक कर्मचारी से था। आरोपी पहले से शादीशुदा था, लेकिन उसने यह बात छुपाई। इसी आधार पर पुलिस ने रेप का केस दर्ज किया, क्योंकि संबंध “शादी के वादे” पर बनाए गए थे। साथ ही, धार्मिक भावनाएं आहत करने और धर्म प्रभावित करने की धाराएं भी जोड़ी गईं।
मोबाइल से खुला दूसरा राज
दूसरे आरोपी तौसीफ अत्तर के मोबाइल में एक हिंदू सहकर्मी की फोटो मिली, जो मुस्लिम पोशाक में थी। इसके बाद पूछताछ में और नाम सामने आए और दूसरी FIR दर्ज हुई। अब तक कुल 9 FIR दर्ज हो चुकी है। इनमें से 6 मामलों में धर्म प्रभावित करने के आरोप हैं। जिन लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है, उनमें दानिश शेख, तौसीफ अत्तर, शफी शेख, आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी, रज़ा मेमन और अश्विनी चैनानी है, जबकि एक आरोपी (नीदा खान) फरार है।
अन्य आरोप क्या हैं?
महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि काम के दौरान उन पर अश्लील टिप्पणियां की जाती थीं। इसके अलावा उन्हें अनुचित तरीके से छूने की कोशिश की जाती थी। इसके अलावा डबल मीनिंग वाली बातें की जाती थीं और मना करने पर काम का दबाव बढ़ा दिया जाता था। वहीं आरोपियों के वकीलों ने कहा कि ये कमजोर और बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए आरोप हैं। वकील के अनुसार, धार्मिक चर्चा या त्योहारों में पहनावा बदलना, “धर्म परिवर्तन नहीं माना जा सकता है।” कंपनी में कुछ महिला कर्मचारियों के साथ कथित यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के मामले में गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या उन्हें अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पैसे मिले थे। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
SIT की जांच में क्या सामने आया?
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, SIT जांच का नेतृत्व कर रहे अधिकारी के अनुसार कोई संगठित साजिश नहीं मिली है। हालांकि, यह कुछ लोगों की व्यक्तिगत धार्मिक सोच और प्रभाव का मामला लगता है। इस बीच, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इस घटना को "बेहद चिंताजनक और पीड़ादायक" बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी की ओर से आरती सुब्रमण्यन (COO, TCS) के नेतृत्व में गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में नाशिक स्थित इस यूनिट का संचालन रुका हुआ है। आरोपियों को कंपनी ने सस्पेंड कर दिया है।




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