FD घोटाले में MP के विधायक को 3 साल की सजा, दिल्ली की कोर्ट ने 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया
एक दिन पहले दिल्ली की कोर्ट ने इस घोटाले से जुड़े मामले में राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया था। न्यायालय ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दोषी ठहराया था।

MADHYA PRADESH NEWS दिल्ली की राउज एवेन्यू MP-MLA कोर्ट ने मध्य प्रदेश के 27 साल पुराने एफडी घोटाला मामले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती और बैंक के एक पूर्व कर्मचारी रघुवीर प्रजापति को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। भारती मध्यप्रदेश की दतिया सीट से कांग्रेस विधायक हैं। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह की अदालत ने गुरुवार को दोनों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। हालांकि फैसला सुनाने के साथ ही कोर्ट ने उन्हें जमानत भी दे दी।
कोर्ट ने विधायक को दो धाराओं में 3-3 साल और एक धारा में 2 साल की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले के बाद उनकी विधायकी पर तलवार लटकने लगी है, क्योंकि कानून के अनुसार दो साल या उससे ज्यादा की सजा होने पर विधायकी चली जाती है। हालांकि वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि अपील के लिए उन्हें 60 दिन मिलेंगे। अगर हाईकोर्ट से सजा पर स्टे मिल जाता है, तो उनकी विधायकी बरकरार रह सकती है।
इससे एक दिन पहले बुधवार को अदालत ने राजेन्द्र भारती को धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी के आरोपों में दोषी करार दिया था। न्यायालय ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दोषी ठहराया था।
क्या है पूरा मामला?
घटनाक्रम की शुरुआत 1998 से शुरू होती है, जब श्याम सुंदर संस्थान की अध्यक्ष सावित्री श्याम (राजेंद्र भारती की मां) ने दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में तीन साल के लिए 10 लाख रुपए की एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) कराई थी। जिस पर 13.5% की दर से ब्याज मिलना था। इस दौरान बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र भारती थे और वह ही श्याम सुंदर संस्थान के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्य भी थे।
इसी दौरान बैंक के रिकार्ड में हेराफेरी व कूटरचना कर भारती ने सावधि जमा (FD) की अवधि को 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया। इसके बाद साल 1999 से 2011 के बीच सालाना 13.5% की ब्याज दर के अनुसार 1 लाख 35 हजार रुपए निकाल लिए। इस मामले में बैंक कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी। कोर्ट ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसे धोखाधड़ी का मामला माना और केस दर्ज करने के आदेश दिया था।
साल 2011 में हुआ इस मामले का खुलासा
इस मामले का खुलासा मार्च 2011 में उस वक्त हुआ, जब भाजपा नेता पप्पू पुजारी बैंक के अध्यक्ष बने। वह इस मामले को सामने लाए। सहकारिता विभाग के तत्कालीन संयुक्त पंजीयक अभय खरे ने जांच की, जिसमें एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज हुई। साल 2012 में भारती ने बैंक से एफडी की राशि मांगी, लेकिन ऑडिट आपत्ति के चलते भुगतान से इनकार कर दिया गया।
FD ना मिलने पर भारती ने किया केस, उल्टा पड़ गया दांव
भुगतान न मिलने पर भारती उपभोक्ता फोरम पहुंचे, जहां से राहत नहीं मिली। राज्य उपभोक्ता फोरम से राहत न मिलने के बाद मामला राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम और फिर सुप्रीम कोर्ट तक गया, वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद साल 2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाशचंद्र जांगड़े ने आपराधिक मामला दर्ज कराने की पहल की। कोर्ट के आदेश पर आईपीसी की अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज हुआ। MP-MLA (सांसद-विधायक) कोर्ट गठन के बाद मामला ग्वालियर पहुंचा और अक्टूबर 2025 में इसे दिल्ली के MP-MLA कोर्ट स्थानांतरित किया गया।
कांग्रेस को लगा झटका
इस फैसले के साथ ही मध्य प्रदेश में कांग्रेस को झटका लगा है और राज्य में उसका एक विधायक कम होने का खतरा पैदा हो गया है। दरअसल कानून के अनुसार यदि किसी विधायक को किसी अपराध में अदालत द्वारा 2 साल या उससे अधिक की जेल की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी विधायकी तत्काल प्रभाव से रद्द हो सकती है।




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