'भगवा धारण किया है तो'... हर्षा रिछारिया के संन्यास पर संतों की प्रतिक्रिया; मॉडलिंग पर भी दी नसीहत
साध्वी डॉ. विद्या पुरी ने कहा कि यदि किसी ने भगवा वस्त्र धारण किया है, तो उसे पूर्ण रूप से सनातन धर्म के कार्यों में समर्पित होना चाहिए। उन्होंने हर्षा से अपील की कि वे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फॉलोअर्स के माध्यम से रामायण, गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों का प्रचार करें।

उज्जैन में हाल ही में हर्षा रिछारिया द्वारा संन्यास ग्रहण किए जाने के बाद यह विषय धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। इस मुद्दे पर जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर डॉ. शैलेशानंद गिरि, स्वस्तिक पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. अवधेश पुरी और साध्वी डॉ. विद्या पुरी ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है।
“संन्यास एक आंतरिक अनुभूति”
महामंडलेश्वर डॉ. शैलेशानंद गिरि ने कहा कि संन्यास कोई पूर्व नियोजित प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह एक दिव्य और आंतरिक अनुभूति है, जो किसी भी व्यक्ति के भीतर अचानक उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमीर-गरीब, राजा-रंक—किसी के साथ भी यह अनुभूति घट सकती है। उन्होंने बताया कि हर्षा के संन्यास को लेकर उनकी बातचीत उनके गुरु सुमनानंद जी से हुई थी, जिनके अनुसार सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद ही उन्हें संन्यास की अनुमति दी गई। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अखाड़ा परंपरा के तहत औपचारिक संन्यास सिंहस्थ या कुंभ मेले में ही होता है।
“धर्म के लिए काम करें”
स्वस्तिक पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. अवधेश पुरी ने हर्षा के संन्यास को चर्चा का विषय बताते हुए कहा कि प्रयागराज कुंभ में भी उनकी काफी चर्चा रही थी। उन्होंने बताया कि हर्षा ने महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरी से संन्यास दीक्षा लेकर “हर्षानंद गिरी” नाम धारण किया है।
उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अब जब वे धर्म के मार्ग पर आ चुकी हैं, तो उन्हें अपने प्रभाव और फॉलोअर्स का उपयोग सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए करना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए ऋतंभरा जैसी साध्वियों के कार्यों का उल्लेख किया।
“भगवा धारण किया है तो आचरण भी वैसा हो”
साध्वी डॉ. विद्या पुरी ने कहा कि यदि किसी ने भगवा वस्त्र धारण किया है, तो उसे पूर्ण रूप से सनातन धर्म के कार्यों में समर्पित होना चाहिए। उन्होंने हर्षा से अपील की कि वे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फॉलोअर्स के माध्यम से रामायण, गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों का प्रचार करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संन्यास लेने के बाद भी व्यक्ति पूर्व की तरह मॉडलिंग या एंकरिंग करता है, तो इससे धर्म की छवि प्रभावित हो सकती है। इसलिए संत जीवन के अनुरूप आचरण जरूरी है।
अक्सर चर्चा में रहती हैं
आपको बता दें कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान हर्षा गले में रुद्राक्ष और फूलों की माला, माथे पर तिलक और साध्वी के कपड़ों में संगम नगरी में घूम रहीं थीं। इसी दौरान उनकी खूबसूरती और लुक्स सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए। महाकुंभ के बाद से ही वे लगातार चर्चा में हैं।
रिपोर्ट: विजेंद्र यादव
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