Controversy over Harsha Richhariya Renunciation Former Model Had Made Headlines During the Mahakumbh अभी भी मेकअप कर रहीं और गहने पहन रहीं हर्षा रिछारिया, पूर्व मॉडल के संन्यास पर विवाद, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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अभी भी मेकअप कर रहीं और गहने पहन रहीं हर्षा रिछारिया, पूर्व मॉडल के संन्यास पर विवाद

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आईं पूर्व मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया संन्यास को लेकर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने आपत्ति जताई है। वहीं, आचार्य तन्मय वेदका दातार ने कहा कि हर्षा के संन्यास की प्रक्रिया में पारंपरिक नियमों का पालन नहीं हुआ है।

Fri, 24 April 2026 12:17 PMSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, उज्जैन
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अभी भी मेकअप कर रहीं और गहने पहन रहीं हर्षा रिछारिया, पूर्व मॉडल के संन्यास पर विवाद

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आईं पूर्व मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया संन्यास को लेकर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह संन्यास सनातन धर्म की मर्यादा के विपरीत है। उन्होंने यह भी मांग की है कि हर्षा को दीक्षा देने वाले सुमनानंद गिरि महाराज की जांच की जाए।

गौरतलब है कि उज्जैन स्थित मौनी तीर्थ आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज से 19 अप्रैल को हर्षा रिछारिया ने दीक्षा ली थी। संन्यास के बाद उन्हें स्वामी हर्षानंद गिरि नाम दिया गया है। अब उनके दीक्षा को लेकर विवाद शुरू हो गया है। संन्यास परंपरा का पूजन कराने वाले आचार्य तन्मय वेदका दातार ने कहा कि हर्षा के संन्यास की प्रक्रिया में पारंपरिक नियमों का पालन नहीं हुआ है।

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संन्यास लेने के बाद भी मेकअप और गहनों में नजर आ रही

विवाद की वजह बताया जा रहा है कि हर्षा रिछारिया ने संन्यास लेने के बाद भी आम युवतियों की तरह मेकअप और गहनों के साथ नजर आ रही हैं, जबकि संन्यास परंपरा में इसका उपयोग वर्जित माना जाता है। वह अभी भी पारंपरिक साध्वी स्वरूप या संन्यासी वेशभूषा में नजर नहीं आई हैं। इन आरोपों पर हर्षा ने वीडियो जारी कर जवाब दिया है।

50 बार पूछने के बाद ही दीक्षा दी गई

उन्होंने कहा कि अगर राम ने मेरी किस्मत में संन्यास लिखा है तो उसे कोई नहीं रोक सकता। हालांकि महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि का कहना है कि हर्षा से 50 बार पूछने के बाद ही दीक्षा दी गई है। संन्यास के दौरान हर्षा ने बाल इसलिए नहीं कटवाए क्योंकि वह पहले ही एक बार मुंडन करवा चुकी थीं।

पारंपरिक नियमों का नहीं हुआ पालन

मामले को लेकर आचार्य तन्मय वेदका दातार ने कहा कि हर्षा का संन्यास जल्दबाजी में कराया गया। इसमें कई पारंपरिक नियमों का पालन नहीं हुआ। आचार्य के अनुसार, संन्यास लेने से पहले 17 प्रकार के पिंडदान किए जाते हैं। इनमें माता-पिता के साथ स्वयं का भी पिंडदान शामिल होता है। इस प्रक्रिया में मुंडन कराना अनिवार्य होता है, लेकिन हर्षा का संन्यास बिना बाल कटवाए ही करा दिया गया।

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तब किसी ने आपत्ति नहीं जताई

वहीं, सुमनानंद गिरि ने कहा कि प्रयागराज कुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के दौरान हर्षा शाही रथ पर सवार हुई थीं। तब किसी ने आपत्ति नहीं जताई। मेरे द्वारा दी गई दीक्षा के बाद हर्षा, हर्षानंद गिरि के रूप में पूरी तरह संन्यासी बन चुकी हैं। दीक्षा देने से पहले मैंने हर्षा से बार-बार नियमों के पालन को लेकर पूछा था। लगभग 50 बार पुष्टि करने के बाद ही मैंने दीक्षा दी। उन्होंने यह भी कहा कि अब हर्षा किसी भी अखाड़े में जाएं, इससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है। दीक्षा के समय हर्षा के परिवार के सदस्य भी मौजूद थे।

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