63 साल उम्र, घर सील कर दिया... ट्विशा की सास गिरिबाला ने कोर्ट में खुदके बचाव में क्या दलीलें दीं?
गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नित्या रामकृष्णन ने अदालत से कहा कि 63 वर्षीय महिला के खिलाफ बिना ठोस सबूत के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि उन्होंने जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया है।

ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में सुनवाई के दौरान पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने अपनी अग्रिम जमानत बचाने के लिए कई अहम दलीलें दीं। गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील नित्या रामकृष्णन ने अदालत से कहा कि 63 वर्षीय महिला के खिलाफ बिना ठोस सबूत के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि उन्होंने जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया है।
घर सील था, तो सबूतों से छेड़छाड़ कैसे…
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि घटना के कुछ ही घंटों बाद पुलिस घर पहुंच गई थी और पूरे घर को सील कर दिया गया था। रामकृष्णन ने अदालत को बताया कि पुलिस ने मौके से जब्ती की कार्रवाई की, मोबाइल फोन और अन्य सामान जब्त किए गए और हर दस्तावेज पर गिरिबाला सिंह ने हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि जब घर पहले से सील था और जांच एजेंसियां लगातार वहां मौजूद थीं, तो सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं।
बेल की शर्तों का उल्लंघन नहीं
बचाव पक्ष ने जांच में सहयोग नहीं करने के आरोपों को भी खारिज किया। रामकृष्णन ने कहा कि पहली नोटिस 20 और 21 मई की रात “अजीब समय” पर भेजी गई थी। उन्होंने अदालत में कहा कि 63 साल की महिला को आधी रात में थाने बुलाया गया, लेकिन इसके बावजूद सुबह 5 बजे जवाब देकर पूछताछ के लिए दूसरा समय मांगा गया। उन्होंने कहा कि समय मांगना बेल की शर्तों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
चैट में सास द्वारा दहेज मांगने का स्पष्ट जिक्र नहीं
गिरिबाला सिंह की ओर से यह भी दलील दी गई कि उनके खिलाफ दहेज मांग का कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। बचाव पक्ष ने कहा कि अभियोजन जिन WhatsApp चैट का हवाला दे रहा है, उनमें कहीं भी सास द्वारा दहेज मांगने या प्रताड़ित करने का स्पष्ट जिक्र नहीं मिलता। उल्टा, अदालत को बताया गया कि परिवार की तरफ से ट्विशा को 7 लाख रुपये से ज्यादा दिए गए थे।
वैवाहिक तनाव और दहेज प्रताड़ना एक नहीं
रामकृष्णन ने अदालत से कहा कि मृतका की नाराजगी मुख्य रूप से पति से जुड़ी थी, न कि सास से। उन्होंने कहा कि वैवाहिक तनाव और दहेज प्रताड़ना को एक जैसा नहीं माना जा सकता। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सिर्फ इसलिए किसी महिला को जेल नहीं भेजा जा सकता क्योंकि वह एक चर्चित मामले में आरोपी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी गिरिबाला सिंह की ओर से सफाई दी गई। बचाव पक्ष ने कहा कि उन्होंने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं बुलाई थी, बल्कि वकील के दफ्तर के बाहर मीडिया ने सवाल पूछे थे, जिनका जवाब दिया गया।
सुनवाई के दौरान रामकृष्णन ने कहा कि “सहानुभूति और कानून अलग-अलग चीजें हैं।” उन्होंने अदालत से कहा कि केवल आरोपों के आधार पर कस्टोडियल पूछताछ जरूरी नहीं हो जाती। फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।




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