Tiger and tigress died in Shahdol, MP; what is the reason? टाइगर स्टेट से आई चिंताजनक खबर, बाघ-बाघिन की मौत, इन वजहों से गई जान, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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टाइगर स्टेट से आई चिंताजनक खबर, बाघ-बाघिन की मौत, इन वजहों से गई जान

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के जंगलों से एक बार फिर चिंता बढ़ने वाली खबर सामने आई है। जिले के नॉर्थ शहडोल फॉरेस्ट एरिया में सोमवार को एक बाघ और एक बाघिन के शव बरामद किए गए हैं।

Mon, 2 Feb 2026 05:45 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, शहडोल, पीटीआई
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टाइगर स्टेट से आई चिंताजनक खबर, बाघ-बाघिन की मौत, इन वजहों से गई जान

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के जंगलों से एक बार फिर चिंता बढ़ने वाली खबर सामने आई है। जिले के नॉर्थ शहडोल फॉरेस्ट एरिया में सोमवार को एक बाघ और एक बाघिन के शव बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि एक बाघ की मौत इलाके को लेकर हुई लड़ाई (टेरिटोरियल फाइट) के कारण हुई, जबकि दूसरी बाघिन की जान करंट लगने से गई है।

बाघों की मौत की ये वजह सामने आई

वन विभाग के मुताबिक, शुरुआती संकेतों में यह सामने आया है कि एक बाघ संभवतः अपने इलाके की रक्षा के दौरान किसी दूसरे बाघ से भिड़ गया था, जिसमें उसकी मौत हो गई। वहीं दूसरी ओर, बाघिन की मौत इलेक्ट्रोक्यूशन यानी बिजली के करंट की वजह से हुई मानी जा रही है। यह आशंका जताई जा रही है कि जंगल क्षेत्र में अवैध बिजली तार या बाड़ के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है।

बाघों की मौत पर क्या बोले अधिकारी

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णमूर्ति ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि दोनों शव अलग-अलग जगहों पर पाए गए हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की एक विशेष टीम मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम और जांच-पड़ताल के बाद ही इन मौतों के वजहों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।

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बाघों की बढ़ती मौत पर कोर्ट का नोटिस

मध्य प्रदेश को देश का ‘टाइगर स्टेट’ कहा जाता है, क्योंकि यहां देश में सबसे ज्यादा बाघ पाए जाते हैं। ऐसे में बाघों की लगातार हो रही मौतें सरकार और वन विभाग दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। गौरतलब है कि 20 जनवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बाघों की बढ़ती मौतों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था।

बीते साल 54 बाघों की मौत का दावा

यह नोटिस वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर याचिका पर जारी किया गया था। याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2025 में राज्य में कुल 54 बाघों की मौत हुई, जो प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद किसी एक साल में सबसे अधिक है। इनमें से आधे से ज्यादा बाघों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई बताई गई है।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि करंट, शिकार और मानव दखल जैसी समस्याओं पर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो बाघ संरक्षण की कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है।

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