आसाराम के बेटे नारायण साईं का हुआ तलाक, पत्नी को देना होगी इतने करोड़ रुपए की एलुमनी राशि
सूत्रों के अनुसार, इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। वहीं संपत्तियों के सत्यापन को लेकर प्रशासन को दिए गए निर्देशों के बावजूद अब तक विस्तृत जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं की गई है, जिससे आगे विवाद की स्थिति बनी रह सकती है।

मध्य प्रदेश में इंदौर की फैमिली कोर्ट ने लंबे समय से चर्चित वैवाहिक विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम के बेटे नारायण साईं और उसकी पत्नी जानकी हरपालानी के विवाह को समाप्त कर दिया है। अदालत ने तलाक की याचिका स्वीकार करते हुए नारायण साईं को पत्नी को 2 करोड़ रुपए स्थायी भरण-पोषण (एलुमनी) के रूप में देने का आदेश दिया है। नारायण साईं खुद भी धर्मगुरु रह चुका है, और दुष्कर्म के एक मामले में उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद गुजरात के सूरत की जेल में बंद है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तलाक का यह मामला पिछले आठ वर्षों से न्यायालय में लंबित था। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने 2 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसकी आधिकारिक जानकारी मंगलवार को जानकी के अधिवक्ता अनुराग गोयल ने दी।
याचिका में उल्लेख किया गया कि वर्ष 2008 में दोनों का विवाह हुआ था, लेकिन 2013 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं। इस दौरान वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुके थे। पत्नी ने आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया और परित्याग की स्थिति में जीने को मजबूर होना पड़ा। वर्तमान में वे अपनी मां के साथ रह रही हैं। याचिका में नारायण साईं पर अन्य महिलाओं से संबंध होने के आरोप भी लगाए गए। साथ ही सूरत की अदालत द्वारा दुष्कर्म के मामले में सुनाई गई सजा का हवाला भी दिया गया।
5 करोड़ की मांग, 2 करोड़ पर मुहर
पत्नी ने फैमिली कोर्ट से 5 करोड़ रुपए की एलुमनी की मांग की थी, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 2 करोड़ रुपए देने का आदेश पारित किया।
50 लाख भरण-पोषण बकाया
अधिवक्ता अनुराग गोयल के मुताबिक, धारा 125 सीआरपीसी के तहत पहले ही 50 हजार रुपए प्रतिमाह भरण-पोषण देने का आदेश था, लेकिन इसका नियमित भुगतान नहीं हुआ। इसके चलते करीब 50 लाख रुपए की बकाया राशि बन चुकी है, जिसकी वसूली की प्रक्रिया अब शुरू की जाएगी।
हाई कोर्ट में जा सकता है मामला
सूत्रों के अनुसार, इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। वहीं संपत्तियों के सत्यापन को लेकर प्रशासन को दिए गए निर्देशों के बावजूद अब तक विस्तृत जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत नहीं की गई है, जिससे आगे विवाद की स्थिति बनी रह सकती है।
रिपोर्ट– हेमंत




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