sadhvi harsha richharia teachings of sanatani tradition with first pravachan in ujjain हर्षा रिछारिया का कथावाचक अवतार; पहले प्रवचन से दी सनातनी परंपरा की सीख, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
More

हर्षा रिछारिया का कथावाचक अवतार; पहले प्रवचन से दी सनातनी परंपरा की सीख

हर्षा रिछारिया ने उज्जैन में अपना पहला प्रवचन दिया है। उन्होंने सती और शक्तिपीठों के महत्व को समझाते हुए शिव-शक्ति की महिमा बताई। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे।

Fri, 8 May 2026 07:28 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, उज्जैन
share
हर्षा रिछारिया का कथावाचक अवतार; पहले प्रवचन से दी सनातनी परंपरा की सीख

मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने उज्जैन के लक्ष्मीपुरा गांव में अपना पहला सार्वजनिक प्रवचन दिया। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उन्हें सुनने पहुंचे। हर्षा रिछारिया जो अब 'स्वामी हर्षानंद गिरी' कहलाती हैं, उन्होंने अपने डेढ़ घंटे के प्रवचन में देवी शक्ति, माता सती और 52 शक्तिपीठों के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि हिंदी वर्णमाला के 52 अक्षर शक्तिपीठों के बीज मंत्रों से निकले हैं। उन्होंने शिव और शक्ति के अटूट संबंध को समझाते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। हालांकि शुरुआत में वह थोड़ी नर्वस नजर आईं लेकिन उन्होंने सफलतापूर्वक अपना पहला आध्यात्मिक कार्यक्रम पूरा कर लिया।

उज्जैन से करीब 22 किलोमीटर दूर लक्ष्मीपुरा गांव से शुक्रवार को उन्होंने अपने प्रवचन की शुरुआत की। करीब एक बजे शुरू हुए प्रवचन में लक्ष्मीपुरा, कायथा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हर्षानंद गिरी ने राजा दक्ष और माता सती की कथा से शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बिना निमंत्रण कहीं नहीं जाना चाहिए। कार्यक्रम को लेकर उनके जगह-जगह होर्डिंग्स लगाए गए थे।

बता दें कि 19 अप्रैल को उज्जैन स्थित मौनी आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज के मार्गदर्शन में हर्षा ने विधिवत संन्यास ग्रहण किया था। उन्होंने गृहस्थ जीवन त्यागकर 'स्वामी हर्षानंद गिरी' नाम अपनाया है। उनके संन्यास को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा रही। हर्षा लगातार अपने विरोधियों को जवाब देती रहीं।

शक्ति के बिना शिव भी शून्य

हर्षानंद गिरी ने भागवत और शिव महापुराण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शक्ति के बिना शिव भी शून्य हैं। महादेव और आदिशक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। जैसे माता-पिता दोनों का समान महत्व है, वैसे ही शिव और शक्ति भी कभी अलग नहीं हो सकते हैं। हर शिव मंदिर में भगवती और हर देवी मंदिर में महादेव विराजमान होते हैं।

शक्तिपीठों से ही बीज मंत्रों की उत्पत्ति

हर्षानंद गिरी ने श्रद्धालुओं से माता भगवती का स्मरण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सच्चे मन से पुकारने पर मां स्वयं अवने भक्तों की रक्षा के लिए आती हैं। शक्तिपीठों से ही बीज मंत्रों की उत्पत्ति हुई और उनसे ही वर्णमाला बनी है। हर्षा ने शक्ति पीठों के दर्शन की मान्यता बताई और कहा कि पहले पूरी धरती सनातनी थी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:हर्षा रिछारिया के संन्यास पर विवाद, महाकुंभ के दौरान सुर्खियों में आई थीं

मंच पर आने से पहले थी घबराहत, बताया अनुभव

हर्षा बीच-बीच में लिखित नोट्स देखकर भी बोलती नजर आईं। उन्होंने कहा कि वह मंच पर आने से पहले घबराई थीं। कैमरे के सामने बोलना और हजारों लोगों के सामने बोलना अलग अनुभव है, लेकिन गुरु और माता के आशीर्वाद से वह प्रवचन कर पा रही हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:'भगवा धारण किया है तो'... हर्षा रिछारिया के संन्यास पर संतों की प्रतिक्रिया

देवी चेतना और जागृति का स्वरूप

हर्षानंद गिरी ने कहा कि बिना गुरु और माता रानी की कृपा के कथा संभव नहीं है। शुक्रवार को माता रानी का विशेष दिन बताते हुए उन्होंने मातृशक्ति को प्रणाम किया और कहा कि आप हैं तो हम हैं। इस सृष्टि में महादेव और जगत जननी आदि शक्ति ऐसी शक्तियां हैं, जिनका न आदि है और न अंत। देवी चेतना और जागृति का स्वरूप हैं जिनके प्राकट्य का वर्णन किसी शास्त्र में नहीं है। देवी कथा सुनना भी माता रानी की विशेष कृपा से ही संभव होता है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:Ujjain News: हर्षा रिछारिया के संन्यास पर संतों को ही सुन लीजिए

रिपोर्ट- विजेन्द्र यादव

लेटेस्ट Hindi News, Bhopal News, Indore News, Jabalpur News, Gwalior News, Ujjain News के साथ-साथ MP Board Result 2026 Live और MP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।