भोजशाला विवाद पर बोले संघ नेता- अदालत का हर निर्णय स्वीकार करेंगे
Bhojshala controversy: धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर जार कानूनी विवाद पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को कहा- इस मामले से जुड़े सभी तथ्य मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सामने आ चुके हैं और वह अदालत का हर निर्णय स्वीकार करेंगे।

Bhojshala controversy: धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर जार कानूनी विवाद पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को कहा- इस मामले से जुड़े सभी तथ्य मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सामने आ चुके हैं और वह अदालत का हर निर्णय स्वीकार करेंगे।
संघ के नेता बोले- हर निर्णय स्वीकार
संघ के मालवा प्रांत (इंदौर-उज्जैन संभाग) के प्रमुख प्रकाश शास्त्री ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ''हमने इस मामले (भोजशाला विवाद) में अलग से कोई दृष्टिकोण नहीं रखा है और सभी तथ्य अदालत के सामने आ गए हैं।" उन्होंने कहा कि भोजशाला विवाद का मामला अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इसके बारे में टिप्पणी करना ठीक नहीं है। शास्त्री ने कहा, "इस मामले में अदालत का जो भी निर्णय आएगा, हम उसे स्वीकार करेंगे।''
उन्होंने यह बात उस सवाल पर कही जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूछा गया था कि क्या भोजशाला का ऐतिहासिक विवाद अपने समाधान की ओर बढ़ रहा है?
2000 पन्नों की रिपोर्ट में क्या संकेत मिला
एएसआई की 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भोजशाला परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना मस्जिद के मुकाबले पहले से विद्यमान थी और वहां वर्तमान में मौजूद एक विवादित ढांचा प्राचीन मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया था।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष संभवतः 11वीं सदी के इस स्मारक को मस्जिद बताता रहा है।




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