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मरी गाय की खाल उतारने पर दलितों की पिटाई… ऊना केस में 5 दोषियों को 5 साल की सजा

2016 Una flogging case: गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में 2016 में हुए चर्चित दलित पिटाई मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। वेरावल स्थित विशेष एससी/एसटी अत्याचार निवारण अदालत ने 5 दोषियों को 5 साल की सजा सुनाई है।

Tue, 17 March 2026 05:03 PMRatan Gupta पीटीआई, गिर- सोमनाथ
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मरी गाय की खाल उतारने पर दलितों की पिटाई… ऊना केस में 5 दोषियों को 5 साल की सजा

2016 Una flogging case: गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में 2016 में हुए चर्चित दलित पिटाई मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। वेरावल स्थित विशेष एससी/एसटी अत्याचार निवारण अदालत ने 5 दोषियों को 5 साल की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इससे एक दिन पहले अदालत ने इस मामले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि 35 अन्य को बरी कर दिया गया था। एक पुलिसकर्मी की मौत के चलते उसके खिलाफ मामला समाप्त हो गया, जबकि एक नाबालिग के खिलाफ सुनवाई अभी भी लंबित है।

इन धाराओं के तहत सुनाई गई सजा

मंगलवार को विशेष अदालत के न्यायाधीश जे.जे. पंड्या ने दोषियों को एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अधिकतम पांच साल की सजा सुनाई। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत भी सजा दी गई है। इनमें धारा 323 और 324 के तहत तीन-तीन साल, धारा 342 के तहत एक साल और धारा 504 के तहत दो साल की सजा शामिल है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

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बचाव पक्ष के वकील के अनुसार, पांच में से चार दोषी पहले ही छह साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं, जबकि एक अन्य चार साल से ज्यादा समय से जेल में है। ऐसे में उन्हें अब केवल शेष सजा ही काटनी होगी।

गाय की खाल उतारने पर दलितों की हुई थी पिटाई

यह मामला 11 जुलाई 2016 का है, जब ऊना के पास मोटा समाधियाला गांव में चार दलित युवक मृत गाय की खाल उतार रहे थे। इसी दौरान खुद को गौरक्षक बताने वाले लोगों ने उन्हें बुरी तरह पीटा। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद देशभर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे और यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था।

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आरोप है कि युवकों को करीब 4-5 घंटे तक पीटा गया और बाद में उन्हें अवैध रूप से हवालात में भी रखा गया, जहां पुलिसकर्मियों द्वारा भी मारपीट की गई। पुलिस पर आरोपियों के साथ मिलीभगत और सबूतों में हेरफेर करने के आरोप भी लगे थे।

इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने करीब 260 गवाहों के बयान दर्ज किए। हालांकि अदालत ने आरोपियों को हत्या के प्रयास, डकैती, अपहरण, दंगा और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं से बरी कर दिया।

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