हमारी दलीलों को ठीक से सुना तक नहीं गया; MP RS चुनाव में नामांकन रद्द होने पर क्या बोलीं कांग्रेस प्रत्याशी नटराजन
मध्य प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के सामने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है।

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव में मंगलवार शाम को उस वक्त नाटकीय मोड़ आ गया, जब कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया गया। उन पर शपथपत्र में अपने खिलाफ दर्ज एक FIR की जानकारी छुपाने का आरोप लगाते हुए निर्वाचन अधिकारी ने यह ऐक्शन लिया। उधर राज्यसभा की रेस से इस तरह बाहर होने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार नटराजन ने कहा कि एक ऐसे नोटिस के आधार पर मेरा नामांकन रद्द किया गया, जिस पर अभी तक संज्ञान तक नहीं लिया गया था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि नोटिस के खिलाफ उनकी दलीलों को रिटर्निंग ऑफिसर ने ठीक से सुना तक नहीं। नटराजन ने अपने खिलाफ हुए इस ऐक्शन को लोकतंत्र की हत्या करार दिया, और कहा कि अब यह 'वोट चोरी' का मामला नहीं रहा, बल्कि 'सीट चोरी' का मामला बन गया है।
इस बारे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नटराजन ने कहा, 'सदस्य संख्या पूरी नहीं होते हुए भी जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में अपना तीसरा प्रत्याशी उतारा, तो वहीं से गलत हथकंडे अपनाने की शुरुआत हो गई और हमें समझ में आने लगा कि किस तरह से ये संविधान को और लोकतंत्र को कुचलने की राजनीति कर रहे हैं।' नटराजन ने आगे कहा, 'SIR के बहाने और अलग-अलग हथकंडे अपनाकर वोट चोरी तक जो मामला सीमित था, आज वो सीट चोरी तक आ पहुंचा है।'
नटराजन बोलीं- हमारी दलीलों को ठीक से सुना तक नहीं
पूर्व लोकसभा सांसद ने आगे कहा, ‘एक तरफ ये महिलाओं की बात करते हैं, दूसरी तरफ इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं।’ नटराजन ने कहा, 'जब उन्हें दिखा कि कांग्रेस पार्टी तो एकजुट है, इसके नेता व विधायक भी आपस में बंटे हुए नहीं है, बल्कि एकजुट हैं और हमसे लड़ रहे हैं, तो उन्होंने एक ऐसे लीगल नोटिस की आड़ में हमारी चुनाव याचिका को चुनौती दी, जो कि अभी तक संज्ञान में भी नहीं आया था। इसके बाद भी हमारे दोनों वकील साथियों ने सारी दलीलें उनके (निर्वाचन अधिकारी) सामने रखीं, लेकिन उन दलीलों को पूरी तरह से सुना तक नहीं गया, और फैसला आ गया।'
'ये केवल एक राज्यसभा सीट का सवाल नहीं है..'
नटराजन ने आगे कहा, 'इस पूरे घटनाक्रम के बाद ये बहुत स्पष्ट हो गया है कि उनकी नीति क्या है और उनकी नीयत क्या है। ये हम सबके लिए राज्यसभा की एक सीट का सवाल नहीं है, और एक उम्मीदवार के रूप में मेरा सवाल भी नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से हमारे नेता राहुल गांधी 'आइडिया ऑफ इंडिया' और लोकतंत्र के लिए जो लड़ाई लड़ रहे हैं, ये उसका सवाल है।'

'हम लड़ेंगे, लोकतंत्र के दायरे में हर जवाब देंगे'
महिला नेत्री ने आगे कहा, 'आज हमारे देश के सामने गंभीर परिस्थितियां हैं, सवाल यह है कि लोकतंत्र जीतेगा या नहीं, भारत का जो फेडरल स्ट्रक्चर है, वह रहेगा या नहीं, और क्या यहां पर वन पार्टी सिस्टम (एक दलीय प्रणाली) और तानाशाही लाने की जो कोशिश है, वह ध्वस्त होगी या नहीं, और हमारी पूरी पार्टी इकट्ठा होकर इन ताकतों के खिलाफ लड़ेगी और हम इनके खिलाफ लड़ेंगे, जो भी फोरम लोकतंत्र के दायरे में है, हम उसका उपयोग करते हुए इसे चुनौती देंगे।'
तेलंगाना में दर्ज FIR की जानकारी नहीं देने का आरोप
इस बारे में जानकारी देते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने 'पीटीआई' को बताया कि भाजपा के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग अधिकारी) के पास शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है। अधिकारी ने कहा कि इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।
क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए कांग्रेस बेंगलुरू भेज रही थी अपने विधायक
निर्वाचन अधिकारी का यह फैसला ऐसे दिन आया जब 'क्रॉस वोटिंग' से बचने और अपने खेमे को एकजुट रखने के मकसद से कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों का पहला जत्था एक विशेष विमान से पार्टी शासित कर्नाटक के लिए रवाना कर दिया था जबकि दूसरे जत्थे को मंगलवार शाम को बेंगलुरु जाना था।
विवेक तन्खा बोले- कोई ऐसी चीज नहीं छुपाई, जिसे वो बता सकती थीं
उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सदस्य व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने नटराजन के नामांकन को निरस्त किए जाने के मुद्दे पर कहा कि उन्होंने खुद नामांकन पत्रों की जांच की है और उसमें ऐसी कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई थी, जिसे घोषित किया जाना आवश्यक हो।
मैंने पेपर्स जांचे हैं, उनके खिलाफ कोई FIR नहीं: तन्खा
इस बारे में उन्होंने आगे कहा, ‘उनके (नटराजन) खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं थी। केवल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 223 के तहत एक नोटिस था, जिसमें एक आवेदक ने दावा किया था कि उन्हें और अन्य लोगों को 10 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाना चाहिए। मीनाक्षी नटराजन ने उस नोटिस पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा था कि यह नोटिस उन्हें भेजा ही नहीं जा सकता, क्योंकि उनका उस मामले से कोई संबंध नहीं है।’
अगले कदम के लिए पार्टी को सलाह देते हुए तन्खा ने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में चुनाव याचिका दायर की जा सकती है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में पार्टी को सीधे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
MP में तीन सीटों पर होना है राज्यसभा चुनाव
बता दें कि मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को चुनाव होना है। इन तीन सीटों में से दो पर सत्तारूढ़ भाजपा की जीत तय मानी जा रही थी जबकि संख्या बल के लिहाज से तीसरी सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी था। भाजपा ने जिन सीटों पर जीत तय है उन पर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है, जबकि तीसरी सीट पर मध्यप्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया है।




साइन इन